गैस की कीमत का असर चार धाम यात्रा पर भी पड़ने की संभावना

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चारधाम यात्रा 2026 पर होटल एसोसिएशन का अल्टीमेटम, व्यवस्थाएं नहीं सुधरीं तो होटल बंद

गैस की कमी, जर्जर सड़कें और मलबा बना संकट, यात्रा से पहले त्वरित सुधार जरूरी

सीमित यात्री संख्या और पंजीकरण व्यवस्था पर विरोध, सरकार से स्पष्ट नीति की मांग

देहरादून/उत्तरकाशी
चारधाम यात्रा 2026 से ठीक पहले उत्तरकाशी के होटल व्यवसायियों ने व्यवस्थाओं को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। होटल एसोसिएशन उत्तरकाशी ने पर्यटन सचिव धीरज गर्बयाल से मुलाकात कर एक विस्तृत मांग पत्र सौंपते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो चारधाम यात्रा का संचालन करना संभव नहीं होगा और होटल बंद करने की नौबत आ सकती है।

होटल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि 19 अप्रैल 2026 से शुरू हो रही चारधाम यात्रा के लिए अभी तक न तो यात्रियों की संख्या को लेकर कोई स्पष्ट नीति बनी है और न ही जमीनी स्तर पर जरूरी तैयारियां पूरी हो पाई हैं। उन्होंने सरकार के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताते हुए चारों धामों में यात्रियों की सीमित संख्या की बाध्यता को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की। साथ ही ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था को या तो सरल बनाने या पूरी तरह खत्म करने की बात भी प्रमुखता से रखी गई।

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व्यवसायियों ने बताया कि उत्तरकाशी जिले में वर्तमान में प्रतिदिन केवल 120 व्यावसायिक गैस सिलेंडरों का कोटा निर्धारित है, जो यात्रा सीजन में बेहद अपर्याप्त साबित हो रहा है। यमुनोत्री और गंगोत्री दो प्रमुख धाम होने के कारण यहां होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट में गैस की खपत कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में गैस आपूर्ति बढ़ाना बेहद जरूरी है, अन्यथा यात्रियों को भोजन जैसी बुनियादी सुविधाएं देना भी मुश्किल हो जाएगा।

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यात्रा मार्गों की बदहाल स्थिति पर भी एसोसिएशन ने गंभीर चिंता जताई। गंगनानी के पास लिम्चयागाड़ पुल के बह जाने के बाद बने अस्थायी वैली ब्रिज और संकरी सड़क को यात्रा के लिए बड़ा खतरा बताया गया। वहीं झाला से हीना तक डामरीकरण होने के बावजूद हीना से आगे बडेथी ओपन टनल तक करीब 14 किलोमीटर सड़क जर्जर हालत में है। कई स्थानों पर सड़क इतनी संकरी है कि दो वाहनों का पास होना भी मुश्किल हो रहा है।

धरासू से गंगोत्री तक नालूपानी, रतुड़ीसेरा, बंदरकोट, भटवाड़ी और धराली क्षेत्र में अब भी मलबा सड़क पर जमा है, जिससे यात्रा प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से धराली में आपदा के बाद जमा मलबे के कारण नदी का स्तर सड़क के बराबर पहुंच गया है, जो किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। सोनगाड़ के पास भी सड़क और नदी का स्तर लगभग बराबर होने से खतरा बना हुआ है।

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होटल एसोसिएशन ने मांग की है कि यात्रा मार्गों पर जगह-जगह लगाए गए पुलिस बैरियर हटाए जाएं, सड़कों का चौड़ीकरण किया जाए और सभी खतरनाक स्थानों पर सुरक्षात्मक कार्य तत्काल पूरे किए जाएं। साथ ही ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल को वर्षभर खुला रखने और यात्रियों के लिए प्रक्रिया को सहज बनाने पर भी जोर दिया गया।

अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह मटूडा और सचिव सुभाष सिंह कुमाई सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि यदि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो चारधाम यात्रा 2026 की सफलता पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने साफ किया कि प्रशासन और सरकार को जमीनी हकीकत समझते हुए तुरंत ठोस निर्णय लेने होंगे, अन्यथा होटल व्यवसायियों के सामने यात्रा संचालन बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

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