वर्तमान समय में आध्यात्मिक क्रांति की नितांत आवश्यकता: महात्मा सत्यबोधानंद

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मानव उत्थान सेवा समिति के राष्ट्रीय संगठन सचिव महात्मा सत्यबोधानंद जी सत्संग की महिमा बताते हुए कहा कि सत्संग मनुष्य के अंदर विवेक जागृत करते हुए उसे जीवन के वास्तविक मूल्य का ज्ञान कराता है सत्संग के माध्यम से व्यक्ति विषय विकारों से मुक्त होकर उसे परम तत्व को जान लेता है

जिसका ज्ञान समय-समय पर ज्ञानी संत महात्मा महापुरुषों द्वारा इस धारा धाम में दिया गया महात्मा सत्यबोधानंद जी एवं प्रचारिका बाई जी यहां बिंदुखत्ता के इंदिरा नगर प्रथम में आयोजित सत्संग सम्मेलन में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे संत महात्माओं ने कहा कि वर्तमान समय आध्यात्मिक क्रांति को लाने का समय है क्योंकि अध्यात्म से विमुख होने के कारण वर्तमान में अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है सद्भावना समरसता सौहार्द की बजाय दुर्भावना द्वेष कटुता बढ़ रही है संत महात्माओं ने कहा कि सत्संग की महिमा वेद पुराणों एवं उपनिषदों में बताई गई है ऐसे में जहां कहीं भी सत्संग हो उसे श्रवण करने का अवसर नहीं गवाना चाहिए क्योंकि जीवन की सबसे अनमोल एवं वास्तविक कमाई यही आध्यात्मिक ज्ञान सत्संग है यहां मुख्य यजमान जगदीश कांडपाल कमला कांडपाल दीपक कांडपाल भावना कांडपाल के अलावा भुवन चंद भट्ट देवी दत्त भट्ट स्वामीनाथ पंडित भगवान दास वर्मा अर्जुन नाथ गोस्वामी रमेश नाथ महेश पांडे डॉक्टर आर पी श्रीवास्तव डॉक्टर सरिता श्रीवास्तव पुष्पा भट्ट नंदी उप्रेती समेत अनेकों श्रद्धालु जन मौजूद रहे