आस्था का केंद्र है बिंदुखत्ता का विंदेश्वर महादेव मंदिर, 15 फरवरी को होगा विराट सद्भावना सम्मेलन
श्री हंस प्रेम योग आश्रम संजय नगर द्वितीय बिंदुखत्ता स्थित बिंदेश्वर महादेव मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है श्रद्धा और विश्वास को नमन करते हुए अनेकों श्रद्धालु जन बिंदेश्वर महादेव मंदिर में पूजा अर्चना कर अपना अभीष्ट प्राप्त करते हैं बिंदेश्वर महादेव मंदिर बिंदुखत्ता की बसावट का सबसे प्राचीनतम देव स्थल है इस मंदिर की स्थापना कब व कैसे हुई इसकी कोई सटीक जानकारी तो नहीं है लेकिन पुराने भक्तजनों के मुताबिक वर्ष 1932 के आसपास परम संत योगीराज हंस जी महाराज देश भ्रमण के दौरान इस स्थान पर रुके बताते हैं कि एक अलौकिक आभा का एहसास होने पर कुछ पल यहां विश्राम किया

और इस पावन भूमि की महत्व को बताया बाद में जगत जननी राज राजेश्वरी माताजी ने उक्त स्थल पर शिवलिंग की स्थापना की और उसे बिंदेश्वर महादेव नाम दिया गया कालांतर में ब्रह्मलीन संत परमानंद जी द्वारा इस स्थान को अपनी तपोभूमि बनाया गया और धीरे-धीरे इस स्थान की ख्याति सर्वत्र फैलने लगी वियावान जंगल में स्थित यह मंदिर भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र रहा

और साधना स्थली के रूप में भी अनेक संत महात्माओं का यहां पर आना-जाना हुआ बाद में इस मंदिर के जीर्ण शीर्ण होने पर स्थानीय भक्तजनों की भावनाओं का सम्मान करते हुए मानव उत्थान सेवा समिति के राष्ट्रीय संगठन सचिव महात्मा सत्यबोधानंद जी ने श्रद्धालुओं के सहयोग से इस मंदिर का पुनर्निर्माण एवं सौंद्रीकरण करवाया अब यह मंदिर बेहद भव्य रूप ले चुका है प्रत्येक वर्ष यहां महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर विशाल मेला लगता है और कुमाऊं के सबसे लोकप्रिय मेले में इसका नाम सुविख्यात रहा इस वर्ष 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व पर विराट सद्भावना सम्मेलन का आयोजन होगा जिससे अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक संत मानव धर्म के प्रणेता सदगुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज संबोधित करेंगे उनके साथ वंदनीय अमृता माता जी एवं अन्य दिव्य विभूतियां भी पहुंचेंगे महात्मा सत्यबोधानंद जी ने बताया कि इस अवसर पर विभिन्न तीर्थ स्थलों के सैकड़ो संत महात्मा भी सम्मेलन में पहुंचेंगे बिंदेश्वर महादेव मंदिर पहुंचने के लिए लाल कुआं से निजी वाहन अथवा किराए के वाहन से भी पहुंचा जा सकता है वर्तमान में आश्रम में बिंदेश्वर महादेव मंदिर के अलावा शनि देव मंदिर श्री हंस मंदिर भी शोभायमान है इसके अलावा यहां बैकुंठ धाम गौशाला भी है वर्तमान समय में युवा संत महात्मा आलोकनंद जी आश्रम की व्यवस्थाओं का सुंदर संचालन कर रहे हैं
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