मां पूर्णागिरि के दर्शनों के पश्चात नेपाल स्थित इस मंदिर का दर्शन भी होता है अनिवार्य
उत्तर भारत का सुविख्यात धाम मां पूर्णागिरि दरबार भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है जहां वर्ष भर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना होता है नवरात्रि में तो यहां श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ता है तथा लाखों की संख्या में लोग मां पूर्णागिरी के दरबार में जाकर शीश नवाते हैं और अपने जीवन को धन्य एवं सार्थक करते हैं मां पूर्णागिरि दरबार से ही जुड़ा एक और आस्था का क्षेत्र है सिद्ध बाबा दरबार मान्यता है कि मां पूर्णागिरी की यात्रा का संपूर्ण लाभ तभी प्राप्त होता है जब मां पूर्णागिरि के दर्शन करने के उपरांत सिद्ध बाबा के भी दर्शन किए जाएं सिद्ध बाबा का यह मंदिर नेपाल में स्थित है यहां पहुंचने के लिए टनकपुर शारदा नदी से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है टनकपुर बैराज के बाद कुछ ही दूरी पर नेपाल राष्ट्र की सीमा प्रारंभ हो जाती है नेपाल के कंचनपुर जिले में ब्रह्मदेव नामक स्थान पर यह मंदिर स्थित है मान्यताओं के अनुसार सिद्ध बाबा मां पूर्णागिरि के अन्य भक्त थे वह प्रतिदिन माता के दर्शनों को जाया करते थे एक बार वह अनजाने में मां के शयन कक्ष तक पहुंच गए जिससे मां ने क्रोधित होकर उन्हें नीचे शारदा नदी के किनारे फेंक दिया जहां यह मंदिर आज स्थापित है सिद्ध बाबा ने अपनी भूल के लिए क्षमा मांगी और अनुनय विनय करी जिस पर माता ने उन्हें वरदान दिया कि मेरे मंदिर के दर्शन का पुण्य लाभ पूरी तरह तभी मिलेगा जब भक्त तुम्हारे भी दर्शन करने आएंगे तभी से यह मंदिर बेहद सुविख्यात हो गया आज बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते जाते हैं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जाने से ब्रह्मदेव स्थित नेपाल के लोगों की आजीविका का भी यह बहुत बड़ा केंद्र है क्योंकि इस मंदिर के वजह से ही श्रद्धालुओं का निरंतर आना-जाना लगा रहता है और बड़ी संख्या में लोग नेपाल से खरीदारी भी करते हैं टनकपुर शारदा बैराज के बाद यात्रियों की आने जाने के लिए यहां टैक्सी बाइक भी 10 से ₹15 प्रति सवारी के रूप में उपलब्ध हो जाती है
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