ऋषि पंचमी का पौराणिक महत्व समझा रहे हैं ज्योतिषाचार्य प्रकाश बहुगुणा

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आज 28अगस्त ऋषि पंचमी
ऋषि पंचमी की कथा एक सदाचारी ब्राह्मणी के बारे में है, जिसे उसके पूर्व जन्मों के पापों के कारण कीड़े पड़ जाते थे। पिता की सलाह पर उसने ऋषि पंचमी का व्रत किया, जिससे सभी कष्ट दूर हो गए और उसे अटल सौभाग्य की प्राप्ति हुई। 
कथा का सार
विदर्भ देश में उत्तंक नाम के एक सदाचारी ब्राह्मण रहते थे, जिनकी पुत्री सुशीला ने एक सुयोग्य वर से विवाह किया, लेकिन कुछ समय बाद वह विधवा हो गई। दुखी होकर माता-पिता कन्या के साथ गंगा किनारे कुटिया बनाकर रहने लगे। 
एक दिन पुत्री सो रही थी, और अचानक उसकी मां ने देखा कि उसके शरीर पर कीड़े पड़ गए हैं। मां ने पति से पूछा कि उनकी साध्वी कन्या की यह गति क्यों हुई। ब्राह्मण ने समाधि लगाकर पता लगाया कि पूर्व जन्म में भी उसकी पुत्री ब्राह्मणी थी, और उसने मासिक धर्म के दौरान घर की वस्तुओं को छुआ था, और उसके पति ने भी उसे स्पर्श किया था। 
पाप का कारण और निवारण
धर्म-शास्त्रों के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान महिलाएं अपवित्र होती हैं। पुत्री की इसी गलती के कारण उसे इस जन्म में कीड़े पड़ने का कष्ट मिला था। ब्राह्मण ने बताया कि यदि पुत्री शुद्ध मन से ऋषि पंचमी का व्रत करे तो उसके सभी दुख दूर हो जाएंगे और उसे अगले जन्म में अटल सौभाग्य प्राप्त होगा। 
व्रत का प्रभाव
पिता की आज्ञा से पुत्री ने विधिपूर्वक ऋषि पंचमी का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से वह सारे दुखों से मुक्त हो गई और अगले जन्म में उसे अक्षय सुखों के साथ अटल सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसलिए यह व्रत महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, खासकर मासिक धर्म से जुड़े अनजाने पापों से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है /

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लेखक प्रकाश बहुगुणा सुविख्यात ज्योतिष एवं कर्मकांड के जानकार हैं तथा अनेक वेद पुराणों के भी अच्छे मर्मज्ञ हैं