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ईश्वर के प्रति अटूट निष्ठा एवं आस्था का पर्व है होली: महात्मा सत्यबोधानंद

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मानव धर्म के प्रणेता अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक संत सदगुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज के परम शिष्य एवं मानव उत्थान सेवा समिति के राष्ट्रीय संगठन सचिव महात्मा सत्यबोधानंद जी ने होली के पावन पर्व की शुभकामना देते हुए कहा कि रंगों का पर्व होली ईश्वर के प्रति अटूट आस्था एवं निष्ठा का प्रतीक है उन्होंने कहा कि रोम रोम में भक्ति का रंग समा जाए यही होली का असली संदेश है उन्होंने कहा कि जब भक्ति का रंग गहरा होने लगेगा तब ज्ञान एवं वैराग्य स्वतह ही जीवन में आ जाएगा क्योंकि ज्ञान एवं वैराग्य की जननी भक्ति ही है उन्होंने कहा कि अनेक प्रसंग एवं कथाएं आती हैं जिसमें अटूट भक्ति के आगे स्वयं भगवान भी भक्त को दर्शन देने आते हैं उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से भक्त प्रहलाद को अपने ईस्ट आराध्य पर अटूट विश्वास था और अनेक यातनाओं के बाद भी भक्त प्रहलाद का कुछ भी नहीं बिगड़ा बल्कि हिरण्यकश्यप एवं होलिका को अपने प्राण गंवाने पड़े ठीक इसी प्रकार से प्रत्येक शिष्य को चाहिए कि वह सदैव अपने सदगुरुदेव के प्रति अटूट आस्था एवं निष्ठा के साथ जुड़ा रहे क्योंकि सदगुरुदेव की कृपा ही पग पग में भक्त की रक्षा करती है और जिंदगी भर एक रक्षा कवच भक्त के चारों ओर बना रहता है महात्मा सत्यबोधानंद जी ने कहा कि सदैव उस नाम का सुमिरन करें जो गुरु महाराज जी के द्वारा दिया गया है जो अजपा है अनमोल है जो निरंतर सांसों में रमन करता है उन्होंने कहा कि रंगों का पर्व होली परस्पर सौहार्द एवं सद्भावना का भी प्रतीक है और यह अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है जिसे याद कर हर वर्ष उल्लास और उमंग के रूप में इस पर्व को मनाया जाता है

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