नई श्रम संहिताओं को बताया गुलामी का दस्तावेज
हल्द्वानी
23 नवंबर
- नए लेबर कोड श्रमिक वर्ग के लिए आधुनिक गुलामी के दस्तावेज हैं : डॉ कैलाश पाण्डेय
- “व्यापार करने में सुगमता” के नाम पर गुलामी और शोषण को संहिताबद्ध करती हैं श्रम संहिताएं
- 24 नवंबर को ऐक्टू की ओर से लेबर कोड की प्रतियां जलायी जायेंगी, 26 नवंबर को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साझा मंच और संयुक्त किसान मोर्चा के साथ प्रतिवाद और अवज्ञा दिवस कार्यक्रम होगा
कामगारों और मेहनतकश जनता के भारी विरोध के बावजूद केंद्र सरकार ने 21 नवंबर को चार श्रम संहिताओं को अधिसूचित कर दिया है. ये चार श्रम संहिताएं वेतन संहिता, 2019; व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्त संहिता, 2020; सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020; और औद्योगिक संबंध संहिता, 2020- भले ही “श्रम सुधार” के नाम पर पेश की गयी हों पर ये अनिवार्य रूप से ऐसे औजार हैं जो “व्यापार करने की सुगमता” के आवरण के नीचे बड़े व्यवसाय और कॉरपोरेट हितों के मुनाफे के लिए आधुनिक गुलामी और शोषण को संहिताबद्ध करते हैं. भाकपा माले नैनीताल जिला कमेटी के द्वारा जारी प्रेस बयान में यह बात कही गई।
भाकपा माले नैनीताल जिला सचिव डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, ये श्रम कोड औद्योगिक सुरक्षा अनुपालन, मजदूरी व हित की जरूरतों को भयानक रूप से शिथिल करती हैं और संगठन बनाने व सामूहिक कार्रवाई करने जैसे मजदूरों के अनथक संघर्षों से हासिल तमाम अधिकारों को प्रभावी तौर पर नेस्तनाबूद कर देती हैं. सुरक्षा उपायों और कल्याणकारी प्रावधानों को लागू करने के पैमाने को व्यवसाय के पक्ष में ऊपर कर दिया गया है, जो मजदूर वर्ग के बड़े हिस्से को बंधुआ मजदूरी जैसे हालात में धकेल देगा और श्रम के अनौपचारीकरण और ठेकाकरण की राह को और सुगम बना देगा. चार श्रम संहिताओं का उद्देश्य और लक्ष्य सुधार नहीं है बल्कि कॉरपोरेट मुनाफाखोरी को सुगम बनाने के लिए मजदूरों के अधिकार और सुरक्षा को छीनना है.
माले नेता ने कहा कि, श्रम शक्ति नीति 2025 के हालिया मसौदे के साथ, ये श्रम संहिताएं मोदी सरकार के उस प्रतिगामी और मजदूर विरोधी चरित्र का प्रतिबिंब हैं, जो इस देश के मजदूरों और मेहनतकश आवाम को खून चूसने के मतलब का समझता है तथा उन्हें और अधिक गुलामी जैसी स्थितियों में धकेलने की कोशिश कर रहा है.
भाकपा (माले) इन मनमानीपूर्ण और जन विरोधी श्रम संहिताओं को वापस लिए जाने और उस भारतीय श्रम सम्मलेन (आई एल सी) को आहूत किये जाने की मांग करती है, जिसे मोदी सरकार पिछले दस साल से ठंडे बस्ते में डाले हुए है.
श्रम संहिताओं को लागू किये जाने के खिलाफ और श्रम शक्ति नीति 2025 को वापस लिए जाने की मांग करने के लिए, कल 24 नवंबर को ट्रेड यूनियन महासंघ ऐक्टू की ओर से सभी जगह लेबर कोड की प्रतियां जलायी जायेंगी। इसके साथ ही केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साझा मंच और स्वतंत्र औद्योगिक फेडरेशनों ने संयुक्त किसान मोर्चा के साथ मिल कर 26 नवंबर 2025 को प्रतिवाद और अवज्ञा दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया है, भाकपा (माले) सभी मेहनतकश लोगों से लेबर कोड के खिलाफ होने वाले विरोध दिवसों में शामिल होने और इसका समर्थन करने की अपील करती है.
डॉ कैलाश पाण्डेय,
जिला सचिव,
भाकपा (माले) नैनीताल
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