जारी है पर्यावरण विद डॉक्टर आशुतोष पंत का पर्यावरण संरक्षण अभियान
अभी जारी है पौधरोपण अभियान
विगत दिवस लालकुआं में कार रोड, संजयनगर, बिंदुखत्ता के ग्रामीणों को फलों के पौधे भेंट किये। यहां उत्तराखंड शासन के पूर्व अपर सचिव श्री जे सी उप्रेती, दिव्यांग समिति के अध्यक्ष श्री संतोष कश्यप का सहयोग मिला।
यह जिज्ञासा होना स्वाभाविक है कि क्या अक्टूबर में भी पौधरोपण हो सकता है। वैसे तो बड़े स्तर पर पौधरोपण करने के लिए सबसे बेहतर समय जुलाई से सितम्बर तक होता है पर इस वर्ष अक्टूबर में कई बार अच्छी बारिश हुई है तो मौसम अभी अनुकूल है। इस वर्ष मैंने अपना लक्ष्य भी ज्यादा रखा था (35 हजार पौधे लगाने का) तो अभी नर्सरी में काफी संख्या में पौधे बच गए हैं। इन्हें जल्दी से जल्दी लगाने का प्रयास रहेगा।
मेरा अनुभव है मैदानी क्षेत्रों में मई – जून और 15 दिसंबर से 15 फरवरी तक बड़ी संख्या में पौधे नहीं लगाने चाहिए क्योंकि इस अवधि में नए पौधों को बचाना मुश्किल होता है। मई जून में तेज गर्मी पड़ती है तो दिसंबर से 15 फरवरी के बीच पाला पड़ता है। हालांकि पूरी देखभाल की जाय तो विपरीत परिस्थिति में भी पौधों को बचाया जा सकता है पर उसके लिए विशेष प्रयासों की जरूरत होती है।
ध्यान देने योग्य है कि सर्दी के मौसम में भी कुछ किस्मों के पौधे लगाए जाते हैं जैसे मैदानी क्षेत्र में पॉपलर आदि और पर्वतीय क्षेत्र में अखरोट, सेब, नाशपाती, आड़ू आदि के पौधे। ये पौधे शीतकाल में सुषुप्तावस्था (dormancy) में रहते हैं इस समय इनमें पत्ते नहीं होते हैं पर मार्च में इनमें कोंपल आ जाती हैं।
हर साल की तरह इस साल भी मेरी जनवरी – फरवरी में पर्वतीय क्षेत्र में अखरोट के पौधे लगाने की योजना है।
विकास के नाम पर अंधाधुंध पेड़ काटे जा रहे हैं, जंगल खत्म किए जा रहे हैं यह स्थिति निराशाजनक है पर यह सब देखकर हमें हिम्मत नहीं हारनी है। हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने हैं।
पौधरोपण के अलावा मैं स्कूलों/कॉलेजों में विद्यार्थियों को जल संरक्षण, पॉलीथीन का प्रयोग रोकने, पेड़ लगाने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा हूं। पर्यावरण प्रेमी मित्रों और शुभचिंतकों का साथ मिलता रहा तो एक दिन स्थितियां जरूर बदलेंगी।
डॉ आशुतोष पन्त
पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी/पर्यावरणविद।

