हल्दूचौड़ के भुवन को मिला ब्राह्मण गौरव सम्मान
दोनों पैर गंवाने के बाद भी नहीं टूटा हौसला: भुवन चंद्र गुणवंत ने राष्ट्रीय मंच पर रचा इतिहास, “ब्राह्मण गौरव” सम्मान से सम्मानित
गुवाहाटी में राष्ट्रीय पैरा लॉन बॉल चैंपियनशिप में रजत व कांस्य पदक, दिव्यांग सशक्तिकरण और जनसेवा का बना राष्ट्रीय मॉडल
हल्द्वानी/नैनीताल। उत्तराखण्ड के नैनीताल जनपद के एक छोटे से गांव दौलिया से निकलकर राष्ट्रीय पहचान बनाने वाले भुवन चंद्र गुणवंत आज संघर्ष, साहस और सामाजिक नेतृत्व का ऐसा उदाहरण बन चुके हैं, जिसकी गूंज राज्य की सीमाओं से निकलकर पूरे देश में सुनाई दे रही है। भगवान परशुराम जन्मोत्सव के अवसर पर अखिल ब्राह्मण उत्थान महासभा, उत्तराखण्ड द्वारा आयोजित एक भव्य समारोह में उन्हें उनके असाधारण योगदान के लिए “ब्राह्मण गौरव” सम्मान से विभूषित किया गया। यह सम्मान उन्हें आध्यात्मिक संत स्वामी आनंद स्वरूप द्वारा प्रदान किया गया।

24 अक्टूबर 1971 को जन्मे भुवन चंद्र गुणवंत का जीवन किसी प्रेरक ग्रंथ से कम नहीं है। वर्ष 2009 की एक भीषण सड़क दुर्घटना में दोनों पैर खो देने के बाद जहां अधिकांश लोग जीवन से हार मान लेते हैं, वहीं भुवन चंद्र गुणवंत ने इस चुनौती को अपनी शक्ति बना लिया। 100 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने न केवल आत्मनिर्भरता हासिल की, बल्कि हजारों दिव्यांगजनों के लिए उम्मीद और मार्गदर्शन का स्रोत बन गए।
उनकी उपलब्धियों का सबसे ताजा उदाहरण 26 से 28 मार्च 2026 तक असम के सरूसजाई स्टेडियम, गुवाहाटी में आयोजित राष्ट्रीय पैरा लॉन बॉल चैंपियनशिप में देखने को मिला, जहां उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए
रजत पदक (द्वितीय स्थान) और कांस्य पदक (तृतीय स्थान) अपने नाम किए। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड के दिव्यांग खिलाड़ियों की क्षमताओं का राष्ट्रीय मंच पर सशक्त प्रदर्शन भी है। इससे पूर्व वे नेशनल पैरा स्विमिंग, बैडमिंटन और वॉलीबॉल जैसे विभिन्न खेलों में देशभर में प्रतिभाग कर अपनी बहुमुखी खेल क्षमता का परिचय दे चुके हैं, जबकि राज्य स्तर पर अनेक स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक उनके खाते में दर्ज हैं।
खेल उपलब्धियों से आगे बढ़ते हुए, भुवन चंद्र गुणवंत ने दिव्यांग सशक्तिकरण को अपना मिशन बना लिया है। वे वर्षों से हजारों दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं—जिसमें UDID कार्ड, दिव्यांग प्रमाण पत्र, रेलवे व बस पास, सहायक उपकरण उपलब्ध कराना शामिल है। वे न केवल समस्याओं की पहचान करते हैं, बल्कि समाधान तक पहुंचाने के लिए प्रशासन और समाज के बीच एक प्रभावी सेतु की भूमिका निभाते हैं।
उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता का दायरा आपदा और सेवा कार्यों तक भी फैला है। नेत्र कुंभ हरिद्वार 2021 में दो माह तक निरंतर निस्वार्थ सेवा हो या जरूरतमंदों की सहायता—वे हर मोर्चे पर सक्रिय रहे हैं। योग के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025, हैदराबाद में उत्कृष्ट प्रदर्शन और इंडिया टीवी के लाइव कार्यक्रम (2023) में स्वामी रामदेव के साथ कठिन योगासन प्रस्तुत कर उन्होंने यह सिद्ध किया कि शारीरिक सीमाएं इच्छाशक्ति के सामने छोटी पड़ जाती हैं।
प्रशासनिक और संस्थागत स्तर पर भी उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे वर्तमान में ‘सक्षम’ (समदृष्टि क्षमता विकास एवं अनुसंधान मंडल) उत्तराखंड के प्रांत सहसचिव, दिव्यांग प्रकोष्ठ (भाजपा) के प्रदेश सहसंयोजक, राष्ट्रीय गतिशील दिव्यांगजन संस्थान (भारत सरकार) की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य, तथा राष्ट्रीय न्यास के अंतर्गत जिला नैनीताल की लोकल लेवल कमेटी के सदस्य हैं। साथ ही, वे वर्ष 2019 से लगातार निर्वाचन आयोग के जिला मतदाता आइकॉन के रूप में लोकतांत्रिक जागरूकता को भी मजबूत कर रहे हैं।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि भुवन चंद्र गुणवंत का जीवन केवल व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि “संभावनाओं की पुनर्परिभाषा” है। उन्होंने यह साबित किया है कि यदि संकल्प अडिग हो, तो विपरीत परिस्थितियां भी सफलता की सीढ़ी बन सकती हैं। उनका जीवन आज उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है, जो चुनौतियों के सामने हार मान लेते हैं।
“ब्राह्मण गौरव” सम्मान से सम्मानित किया जाना उनके अब तक के योगदान की औपचारिक मान्यता है, लेकिन उनके कार्यों का प्रभाव इससे कहीं अधिक व्यापक और दूरगामी है। भुवन चंद्र गुणवंत आज एक ऐसे जननेता, खिलाड़ी और समाजसेवी के रूप में उभर रहे हैं, जो दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, बल्कि शक्ति में बदलने की जीवंत मिसाल बन चुके हैं।