लालकुआं में राज्य आंदोलनकारियों एवं उक्रांद की बैठक में यूकेडी की मजबूती पर दिया बल
लालकुआं में आयोजित राज्य आंदोलनकारियों एवं उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक में उत्तराखंड क्रांति दल को सशक्त एवं मजबूत बनाए जाने पर गहन विचार मंथन किया गया वक्ताओं ने इस बात पर चिंता जताई कि उत्तराखंड राज्य प्राप्ति का जो सबसे प्रमुख सशक्त दल उत्तराखंड क्रांति दल रहा वहीं आज हाशिए पर है जिसका नुकसान उत्तराखंड की जनता को उठाना पड़ रहा है वक्ताओं ने कहा कि जिस मूल अवधारणा को लेकर उत्तराखंड राज्य की मांग की गई यहां की छात्र शक्ति मातृशक्ति युवा शक्ति बुजुर्गों सभी ने राज्य प्राप्ति के लिए कड़ा संघर्ष किया और अनेक कुर्बानियां यातनाओं तथा संघर्षों को झेलने के बाद उत्तराखंड राज्य बना लेकिन राज्य बनने के 26 वर्षों बाद तक राज्य के जो सपने देखे गए थे पृथक राज्य की जो परिकल्पना की गई थी वह आज तक पूरे नहीं हो सके हैं वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल सशक्त बनकर सामने आएगा तो इसका लाभ निश्चित रूप से उत्तराखंड की जनता को मिलेगा क्योंकि पहाड़ के दर्द को पहाड़ की समस्या को सिर्फ उत्तराखंड क्रांति दल ही समझ सकता है और जो पहाड़ के दर्द को पहाड़ की समस्याओं को समझेगा वही उसका समाधान भी कर सकता है बैठक में तय किया गया कि बैठक को गोष्ठियों और जनसभाओं के माध्यम से उत्तराखंड क्रांति दल को आम जनता से जोड़ा जाएगा तथा सदस्यता अभियान पर जोर दिया जाएगा वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड राज्य उत्तराखंड की जनता के संघर्षों का त्याग का बलिदान का परिणाम है और उत्तराखंड क्रांति दल ने प्रथक राज्य की मांग को जोरदार तरीके से आगे रखा उत्तराखंड राज्य प्राप्त हुआ लेकिन जो मूल अवधारणा उत्तराखंड राज्य के लिए रखी गई थी या सोची गई थी वह आज हाशिए पर है उत्तराखंड क्रांति दल की मजबूती से उत्तराखंड समग्र विकसित राज्य बनेगा और यहां की मूल अवधारणा को साकार करेगा यहां जगदीश होटल में हुई बैठक में उत्तराखंड क्रांति दल के संस्थापक सदस्य केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रमुख राज्य आंदोलनकारी खड़क सिंह बगड़वाल राज्य आंदोलनकारी प्रकाश उत्तराखंडी ललित कांडपाल विक्की पाठक उक्रांद के जिला अध्यक्ष प्रताप सिंह चौहान केंद्रीय संगठन मंत्री भुवन सिंह बिष्ट पहाड़ी श्याम सिंह नेगी डिगर सिंह बोरा राम बहादुर प्रिंस जग्गी भगवत सिंह दानू मौजूद रहे
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी ललित कांडपाल का बड़ा सवाल: आखिर कब बनेगा बिंदुखत्ता राजस्व गांव