अखंड सौभाग्य का प्रतीक है वट सावित्री व्रत : बृजेंद्र पांडे गुरुजी

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मां बगलामुखी के परम साधक बृजेंद्र पांडे गुरुजी ने वट सावित्री व्रत की समस्त क्षेत्र वासियों को शुभकामनाएं देते हुए इसके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला है उन्होंने कहा कि वट सावित्री व्रत सुहागन स्त्रियों के द्वारा अपने पति की लंबी आयु के लिए किया जाने वाला अत्यंत महत्व का व्रत है जो पौराणिक आस्था एवं मान्यताओं से जुड़ा हुआ है उन्होंने कहा कि इस दिन सुहागन स्त्रियां व्रत धारण कर अपने पति की लंबी आयु की कामना करते हुए अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं उन्होंने कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मद्र देश के राजा अश्वपति की कोई संतान नहीं थी उन्होंने अखंड साधना कर संतान की प्राप्ति की उनके यहां रूपवान गुणवान कन्या का जन्म हुआ जिसका नाम उन्होंने सावित्री रखा सावित्री के गुण शीलता धैर्य को देखते हुए उनके पिता अश्वपति ने उनसे स्वयं के लिए अपना पति चुनने का आग्रह किया सावित्री ने शाल्व देश के राजा धुमत्सेन के पुत्र सत्यवान को अपने पति के रूप में स्वीकार करने का फैसला लिया किंतु देव ऋषि नारद जो त्रिकालदर्शी थे उन्होंने सावित्री को आगाह किया कि सत्यवान अल्पायु है और उसके माता-पिता को भी निष्कासित कर दिया गया है दोनों आंखों से अंधे हैं और दर दर भटक रहे हैं किंतु सत्यवान को अपने पति के रूप में चुनने का संकल्प ले चुके सावित्री अपने निर्णय से बिल्कुल भी विचलित नहीं हुई और सत्यवान से उसका विवाह हुआ समय बीतता गया देव ऋषि नारद की भविष्यवाणी सच हुई और एक दिन जब दोनों ही पति पत्नी जंगल में लकड़ी लेने गए तब अचानक सत्यवान मूर्छित होकर गिर पड़े और यमराज उनके सूक्ष्म शरीर को लेने आ गए महा तपस्वी सावित्री भी यमराज के पीछे-पीछे चलने लगी और उनके पति के सूक्ष्म शरीर को वापस करने का आग्रह करने लगी इस पर यमराज ने कहा कि जीवन की अवधि पूरी होने के बाद कोई भी प्राणी इस भूमंडल में नहीं रह सकता है किंतु सावित्री यमलोक मार्ग पर चलते चली गई उसकी जिद को देखकर यमराज ने उनसे कोई वर मांगने को कहा सावित्री ने अपने सास ससुर की नेत्र ज्योति को वापस लेने का वर मांगा उसके बाद भी सावित्री उस मार्ग पर चलती चली गई तब यमराज में कोई एक और वर मांगने का आग्रह किया इस पर उसने अपने सास ससुर का खोया हुआ राज्य फिर से प्राप्त हो ऐसा वरदान प्राप्त कर लिया यमराज के तथास्तु कहने के बाद सावित्री फिर भी अपने पति के प्राण वापस लेने की जिद पर आगे बढ़ती गई और उसने यमराज से 100 पुत्र होने का आशीर्वाद मांग लिया यमराज के तथास्तु कहते ही सत्यवान की चेतना वापस आ गई और उसके प्राण बच गए अर्थात सावित्री ने यमराज से भी अपने पति के प्राण को वापस ले लिया तभी से वट सावित्री व्रत की कथा चली आ रही है बृजेंद्र पांडे गुरुजी ने बताया कि वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस तिथि को मनाया जाता है जो इस वर्ष 16 मई को होगा उन्होंने कहा कि 16 मई को सुबह 5:11 से अमावस्या तिथि का प्रारंभ होगा और वह पूरे संपूर्ण दिन और रात तक रहेगी उन्होंने कहा कि व्रत धारण करने से पूर्व वट सावित्री व्रत कथा का भी पाठ करना चाहिए