उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी ललित कांडपाल का बड़ा सवाल: आखिर कब बनेगा बिंदुखत्ता राजस्व गांव
बिंदुखत्ता को आखिर कब मिलेगा राजस्व ग्राम का अधिकार ?
ललित काण्डपाल
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी
बिंदुखत्ता की जनता पिछले कई दशकों से एक ही मांग को लेकर संघर्ष कर रही है बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित किया जाए। यह मांग कोई राजनीतिक जिद नहीं बल्कि लाखों लोगों के जीवन सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा हुआ प्रश्न है आज स्थिति यह है कि बिंदुखत्ता में जन्म लेने वाला व्यक्ति वहीं बूढ़ा हो जाता है, लेकिन उसे अपनी ही भूमि पर पूर्ण अधिकार नहीं मिल पाता आखिर क्यों?
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब कानून मौजूद है, प्रक्रिया मौजूद है, और वनाधिकार कानून 2006 (FRA) स्वयं राज्य सरकारों को वन गांवों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने का अधिकार देता है, तो फिर बिंदुखत्ता को आज तक राजस्व ग्राम घोषित क्यों नहीं किया गया ?
वनाधिकार अधिनियम 2006 की धारा 3(1)(h) स्पष्ट रूप से कहती है कि वन गांवों को राजस्व गांव में बदला जा सकता है। केंद्र सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा 12 जुलाई 2012 को जारी दिशा-निर्देशों में भी राज्य सरकारों को यह प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं
यदि कानून की दृष्टि से रास्ता साफ है तो फिर यह विलंब किस कारण हो रहा है ।
क्या सरकार इस बात का इंतजार कर रही है कि जनता सड़क पर उतरकर अपने अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष करे वर्षों से टैक्स देने वाले देश की सेना में सेवा देने वाले खेती करने वाले और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भाग लेने वाले देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाले लोग आज भी सिर्फ इसलिए अधिकारों से वंचित रहें क्योंकि वे वन क्षेत्र में बसे हुए हैं
बिंदुखत्ता आज केवल एक भूभाग नहीं बल्कि लाखों भावनाओं का नाम है यहाँ रहने वाले लोग कोई अवैध कब्जाधारी नहीं बल्कि पीढ़ियों से इस भूमि को सींचने वाले मेहनतकश नागरिक हैं उन्होंने जंगल को बसाया खेत बनाए सड़कें बनवाईं स्कूल और बाजार खड़े किए लेकिन आज भी वे मूलभूत सुविधाओं और स्थायी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं सरकारों ने समय-समय पर आश्वासन दिए चुनाव आए घोषणाएं हुईं मंचों से वादे किए गए लेकिन राजस्व ग्राम की अधिसूचना आज तक जारी नहीं हुई हाल के आंदोलनों और धरनों में भी जनता ने स्पष्ट कहा है कि बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम बनने की सभी पात्रताएं पूरी करता है और संबंधित फाइलें विभिन्न समितियों से होकर शासन तक पहुंच चुकी हैं
फिर आखिर यह हिचकिचाहट क्यों जनता अब यह समझ चुकी है कि अधिकार मांगने से नहीं, बल्कि संगठित आवाज उठाने से मिलते हैं बिंदुखत्ता की हर गली हर घर और हर परिवार से अब एक ही आवाज निकल रही है हमें हमारा राजस्व ग्राम चाहिए यह केवल जमीन का मामला नहीं है यह सम्मान पहचान और भविष्य का प्रश्न है राजस्व ग्राम बनने से लोगों को भूमि अधिकार स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था विकास योजनाओं का लाभ स्थायी रिकॉर्ड और बुनियादी सुविधाओं का मजबूत ढांचा मिल सकेगा सबसे बड़ी बात लोगों के मन से वर्षों से चला आ रहा असुरक्षा का भाव समाप्त होगा आज आवश्यकता इस बात की है कि राज्य सरकार राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाए और कानून के अनुसार त्वरित निर्णय ले। यदि अन्य क्षेत्रों में समाधान निकल सकता है तो बिंदुखत्ता को क्यों रोका जा रहा है?
लोकतंत्र में जनता का धैर्य उसकी सबसे बड़ी शक्ति होता है, लेकिन जब अधिकार लंबे समय तक टाल दिए जाते हैं, तो वही धैर्य आंदोलन में बदल जाता है। सरकार को यह समझना होगा कि बिंदुखत्ता की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट निर्णय चाहती है। समय आ गया है कि सरकार फाइलों की धूल झाड़कर निर्णय ले और बिंदुखत्ता को उसका वैधानिक अधिकार दे। क्योंकि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के मूलभूत अधिकारों का हनन अनंत समय तक नहीं चल सकता।
बिंदुखत्ता की जनता अब पूछ रही है ।
जब कानून हमारे साथ है, तो सरकार हमारे साथ क्यों नहीं ?
जय हिंद जय भारत जय उत्तराखंड
महात्मा आलोकानंद जी ने किया यश गर्ग एंड एसोसिएट्स का उद्घाटन