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जानिए कब है धनतेरस का शुभ मुहूर्त बता रही हैं डॉक्टर मंजू जोशी

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धनतेरस, प्रदोष व्रत एवं यम दीपदान 2026: आरोग्यता एवं महालक्ष्मी कृपा का पावन पर्व
सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय।
समस्त सनातनीय पाठकों एवं धर्मावलंबियों को सप्रेम सादर नमस्कार एवं प्रणाम। आप सभी को दीपोत्सव एवं धनतेरस पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।

अवगत कराना चाहूंगी दिनांक 06 नवंबर 2026 दिन शुक्रवार को दीपोत्सव पांच दिवसीय कार्यक्रम का प्रथम सोपान धनतेरस पर्व मनाया जाएगा।
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से सनातन परंपरा के महापर्व ‘पंच दिवसीय दीपोत्सव’ का शुभारंभ होता है। यह आरोग्य के देव भगवान धन्वंतरि, धन-वैभव की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी, धन के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर और अकाल मृत्यु का भय दूर करने वाले यमराज की आराधना का परम पावन अवसर है।

वर्ष 2026– पंच दिवसीय दीपोत्सव की प्रामाणिक तिथियाँ
06 नवंबर (शुक्रवार) धनतेरस, प्रदोष व्रत, धन्वंतरि जयंती एवं यम दीपदान।

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07 नवंबर (शनिवार)।रूप चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली)
08 नवंबर (रविवार)। श्री महालक्ष्मी पूजन, दीपोत्सव महापर्व (बड़ी दीपावली)
09 नवंबर (सोमवार)। कार्तिक स्नान-दान अमावस्या
10 नवंबर (मंगलवार) गोवर्धन पूजा (अन्नकूट)
11 नवंबर (बुधवार) यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया (भैया दूज)

वर्ष 2026 धनतेरस विशेष शुभ योग
इस वर्ष धनतेरस पर महालक्ष्मी जी का अत्यंत सोमवार शुक्रवार का सिद्ध योग, शुक्र चंद्रमा की युति से लक्ष्मी, कलात्मक योग,बुधादित्य राजयोग, वैधृति योग एवं हस्त नक्षत्र का अत्यंत फलदायी व दुर्लभ संयोग बन रहा है।

धनतेरस 2026 पूजन एवं शुभ मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 06 नवंबर 2026 को प्रातः 10:32 से 07 नवंबर 2026 को प्रातः 10:49 तक।

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श्रेष्ठ मुहूर्त
प्रदोष काल मुहूर्त: सायं 05:20 से रात्रि 08:09 तक।

वृषभ काल (स्थिर लग्न): सायं 05:48 से रात्रि 07:44 तक (महालक्ष्मी-कुबेर पूजन हेतु सर्वश्रेष्ठ)।

शुभ गोधूलि मुहूर्त: सायं 05:32 से सायं 05:58 तक।
अपराह्न शुभ मुहूर्त (लाभ & अमृत): अपराह्न 12:04 से 02:48 तक।

पूजन विधि–
ईशान कोण में भगवान श्री गणेशजी, माँ लक्ष्मी, धन्वंतरि देव एवं कुबेर जी की स्थापना कर पंचामृत स्नान, वस्त्र, अक्षत, कमलगट्टा व पीले पुष्प अर्पित करें। तत्पश्चात अखंड दीप जलाकर धन्वंतरि व कुबेर मंत्र का जाप करें।

धन्वंतरि मंत्र– ॐ नमो भगवते धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय सर्वभयविनाशाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णवे नमः॥
कुबेर मंत्र– ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।

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यम दीपदान: प्रदोष काल में घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अन्न की ढेरी पर चौमुखी मिट्टी का बड़ा दीपक (सरसों के तेल का) प्रज्वलित कर यमराज से दीर्घायु की प्रार्थना करें।

धनतेरस मंगल क्रय (क्या खरीदें)–

स्वर्ण, रजत(चाँदी), पीतल पात्र या ताँबे का जलपात्र।
दिव्य प्रतीक– श्री गणेश-लक्ष्मी की नवीन मिट्टी/धातु प्रतिमा, झाड़ू।
साबुत धनिया व हल्दी की गांठ।

क्या न खरीदें –
लौह, एल्युमिनियम, प्लास्टिक एवं काँच के पात्र,कैंची, चाकू आदि धारदार वस्तुएँ) एवं कृष्ण वर्ण (काले) वस्त्र।

सायंकाल इन मंत्रों का जाप करें –

ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी
वैदिक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ
8395806256

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