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कल से शुरू होंगे नवरात्र :हाथी पर सवार होकर आएगी मां जगदंबा

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शारदीय नवरात्रि 2026
( जगतजननी का गजारूढ़ आगमन, दुर्लभ महासंयोग और शक्ति-उपासना का महापर्व)

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम्॥

सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय।
समस्त सनातनीय पाठकों, धर्मावलंबियों को सप्रेम नमस्कार एवं प्रणाम, जै माता दी।
भारत विविधताओं का देश है, एक ऐसा महान देश जहाँ तैंतीस कोटि देवी-देवताओं को पूजनीय माना जाता है। संपूर्ण सृष्टि ईश्वर की ही संरचना है और ईश्वर-प्रदत्त प्रत्येक वस्तु पूजनीय है—ऐसी सदैव सनातन धर्म की धारणा रही है। ऐसे ही वर्ष भर अनेक पर्वों के रूप में हम ईश्वर के अनेक स्वरूपों को स्मरण कर उनकी पूर्ण श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना करते हैं और ईश्वर के प्रति आस्था को अपनी भावनाओं के द्वारा अभिव्यक्त करते हैं। इसी क्रम में अश्विन माह शुक्ल पक्ष से शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ होता है। शारदीय नवरात्र से शरद ऋतु का आगमन भी सनातन की वैज्ञानिकता को दर्शाते हैं। शारदीय नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूर्ण श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की जाती है, जिसके द्वारा हम स्त्री के सम्मान को भी दर्शाते हैं और स्त्री के भीतर उपस्थित मातृत्व से लेकर शक्ति रूप के दर्शन पाते हैं।
इस वर्ष 11 अक्टूबर 2026 दिन रविवार से शरद नवरात्रि प्रारंभ हो रही हैं।
हिन्दू वैदिक पंचांग के अनुसार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्र का प्रारंभ होता है। जगत के कल्याण के लिए आदिशक्ति ने अपने तेज को नौ अलग-अलग स्वरूपों में प्रकट किया, जिन्हें हम नव-दुर्गा कहते हैं। नवरात्रि के समय माँ दुर्गा के इन्हीं नौ रूपों की उपासना का विधान है।
शुभ योग
ज्योतिषीय गणना की दृष्टि से इस वर्ष की शारदीय नवरात्रि अत्यंत दुर्लभ और मंगलकारी महासंयोग लेकर आ रही है:
लक्ष्मी-नारायण योग,हस्त नक्षत्र एवं शुक्ल योग, तीन बार सर्वार्थ सिद्धि व अमृत सिद्धि योग, बन रहे है जो कि समस्त कार्यों में सफलता प्रदान करते हैं।

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हाथी की सवारी
शरद नवरात्रि के प्रथम दिवस पर रविवार होने के कारण देवी दुर्गा का आगमन हाथी (गज) पर होगा।
शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे।
गुरौ शुक्रे दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता॥
धार्मिक मान्यतानुसार नवरात्र पर देवी दुर्गा यदि हाथी पर सवार होकर आती हैं, तो यह भक्तों के लिए अत्यंत शुभ संकेत है। हाथी पर आगमन होने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होगी, शांतिपूर्ण वातावरण रहेगा, फसलें अच्छी रहेंगी और चारों दिशाओं में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। देवी दुर्गा का हाथी पर आगमन अत्यंत ही शुभकारक रहेगा।

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नवरात्रि तिथि व नौ देवियाँ
11 अक्टूबर 2026 (प्रथम नवरात्र) — मां शैलपुत्री।

12 अक्टूबर 2026 (द्वितीय नवरात्र) — मां ब्रह्मचारिणी।

13 अक्टूबर 2026 (तृतीय नवरात्र) — मां चंद्रघंटा।
14 अक्टूबर 2026 (चतुर्थ नवरात्र) — मां कूष्मांडा।

15 अक्टूबर 2026 (पंचम नवरात्र) — मां स्कंदमाता ।

16 अक्टूबर 2026 (षष्ठी नवरात्र) — मां कात्यायनी।

17 /18 अक्टूबर 2026 (सप्तम नवरात्र) — मां कालरात्रि पूजन।

19 अक्टूबर 2026 (दुर्गा अष्टमी) — मां महागौरी पूजन।
19 अक्टूबर 2026(महानवमी) — मां सिद्धिदात्री।

20 अक्टूबर 2026 — विजयादशमी (दशहरा), दुर्गा विसर्जन।

घट स्थापना शुभ मुहूर्त– 11 अक्टूबर 2026
प्रातःकालीन मुहूर्त– प्रातः 06:19 से 08:38 तक।
अभिजीत मुहूर्त– पूर्वाह्न 11:44 से 12:30 तक।

कलश स्थापना विधि
नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नानादि के उपरांत सम्पूर्ण घर व पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कीजिए। घी या तिल के तेल से नौ दिनों तक अखंड ज्योत प्रज्वलित करें। तत्पश्चात चौकी पर लाल आसन बिछाएं व आसन के ऊपर थोड़े चावल रखें और एक मिट्टी के बर्तन में जौ बोएं और उस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें, कलश पर स्वास्तिक बनाएं। कलश में साबुत सुपारी, सिक्का और अक्षत डालकर नौ आम के पत्ते रखें। नारियल लें और उस पर चुनरी लपेटकर कलावा से बांध लें। इस नारियल को कलश के ऊपर रखते हुए अब मां दुर्गा का ध्यान व आह्वान करें। प्रतिदिन पूर्ण श्रद्धा पूर्वक माता के नौ रूपों की उपासना करें। घी का दीपक जलाएं। भोग अर्पित करें।
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

माता रानी हम सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करें।

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विशेष संदेश:
नवरात्रि केवल नौ दिनों का अनुष्ठान या माँ की मूर्तियों का पूजन नहीं है, अपितु यह सनातन की उस चेतना का स्मरण है जो हर नारी में शक्ति और ईश्वर का अंश देखती है। यदि हम नौ दिनों तक देवी दुर्गा की आराधना करते हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में अपने घर, परिवार और समाज की स्त्रियों को वह सम्मान, सुरक्षा और अस्तित्व का अधिकार नहीं दे पाते, तो हमारी पूजा अधूरी रह जाती है। आइए, इस नवरात्रि यह संकल्प लें कि माँ जगदम्बा की भक्ति के साथ-साथ हम अपने आसपास की हर स्त्री के स्वाभिमान और अस्तित्व का सदैव हृदय से आदर करेंगे।
ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी
वैदिक ज्योतिषी एवं वास्तु विशेषज्ञ
8395806256

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