बेहतरीन कार्यशैली के रूप में जाना जाएगा वन क्षेत्र अधिकारी मुकुल चंद्र शर्मा का कार्यकाल, समाज सेवा के क्षेत्र में भी प्रस्तुत कर रहे हैं उत्कृष्ट उदाहरण

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समाज में ऐसे भी चुनिंदा लोग होते हैं जो अपनी नौकरी का सफलतापूर्वक निर्वहन करने के बाद सामाजिक जीवन में नागरिक कर्तव्यों का भी बखूबी पालन करते हैं जहां वे अपनी नौकरी में अपनी कार्य कुशलता ईमानदारी एवं कर्तव्य निष्ठा का परिचय देकर विभाग में अपनी एक अमिट छाप छोड़ लेते हैं वहीं वह सामाजिक क्षेत्र में भी सराहनीय कार्य कर लोगों के दिल में जगह बना लेते हैं ऐसे ही कर्मठ ईमानदार कर्तव्य परायण कुशल अधिकारी एवं सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के रूप में जाने जाते हैं वन क्षेत्राधिकारी मुकुल चंद्र शर्मा अपने 40 वर्षों से ज्यादा के सेवा काल के दौरान वन विभाग में उच्च आदर्श स्थापित करने वाले मुकुल चंद्र शर्मा 28 फरवरी 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे है उनका 40 वर्षों से अधिक का सेवाकाल बेहद सराहनीय रहा वर्तमान में नैनीताल वन प्रभाग अंतर्गत मनोरा रेंज में वन क्षेत्राधिकारी के रूप में कार्यरत मुकुल चंद्र शर्मा की प्रथम नियुक्ति वर्ष 1985 में काशीपुर में हुई काशीपुर के अलावा उन्होंने हल्द्वानी डिवीजन के टनकपुर दुगाड़ी रेंज में भी सेवाएं प्रदान की इसके बाद वे तराई केंद्रीय वन प्रभाग में भी 21 वर्ष तक अनेक रेंज में अपनी सेवाएं देते रहे जिसमें मुख्य रूप से टांडा हल्द्वानी बरहनी गगरिया रेंज शामिल है हल्द्वानी डिवीजन तथा तराई केंद्रीय वन प्रभाग के अलावा तराई पूर्वी वन प्रभाग में भी सेवारत रहे मुकुल चंद्र शर्मा एक कर्मठ ईमानदार एवं कार्य कुशलता के धनी अधिकारी के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे वन विभाग में हर कोई उनकी कार्य कुशलता का लोहा मानता रहा मुकुलचंद शर्मा ने जहां वन विभाग में रहकर प्रकृति एवं वन्य जीव जंतु के प्रति अपना अटूट प्रेम न्योछावर किया वहीं उन्होंने जब कभी भी समय मिला तो समाज सेवा के क्षेत्र में भी पीछे नहीं हटे तथा समाज के जरूरतमंद लोगों के बीच में जाकर हर संभव मदद प्रदान करते रहे इसके अलावा समाज के जागरूक एवं मेधावी लोगों को भी प्रोत्साहित करने में उनका अतुल्यनीय योगदान रहा मूल रूप से जनपद नैनीताल के मुक्तेश्वर क्षेत्र के सूड़ गांव के रहने वाले मुकुल चंद्र शर्मा के अंदर परोपकार का जज्बा बचपन से ही पैदा हुआ जो उन्होंने अपने माता-पिता एवं पूर्वजों से सीखा मुकुल चंद्र शर्मा ने जहां वन विभाग में एक आदर्श अधिकारी के रूप में अपनी पहचान बनाई तथा हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत बने वहीं समाज के प्रति एक नागरिक का वास्तविक धर्म एवं कर्तव्य क्या होता है इसे भी उन्होंने अपने कार्यशैली में चरितार्थ किया सामाजिक एकता सौहार्द एवं समरसता के पक्षधर रहे मुकुल शर्मा ने जब कभी भी किसी की मदद को लेकर कदम आगे बढ़ाए तो उन्होंने जाति मजहब क्षेत्र भाषा की दीवारों को नहीं देखा बल्कि मानव धर्म को निभाते हुए उच्च आदर्श प्रस्तुत किया यही वजह है कि आज भी लोग उनके जीवन से सीख लेकर समाज में उच्च आदर्श प्रस्तुत करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं 28 फरवरी को मुकल चंद्र शर्मा भले ही सेवानिवृत हो जाएंगे लेकिन अपने 40 वर्षों से अधिक के कार्यकाल की एक ऐसी गाथा लिखकर आ चुके हैं जिसे याद कर हर कोई उनके कदमों पर आगे बढ़ने की प्रेरणा लेगा मुकुल चंद्र शर्मा का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद वह अपने सामाजिक दायित्वों का बखूबी पालन करेंगे और अपना समय परोपकार जन सेवा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की पूर्ति में व्यतीत करेंगे इधर देश की सुविख्यात मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा मुकुल चंद्र चंद शर्मा को सम्मानित किए जाने का निर्णय लिया गया है इसके स्थान एवं दिनांक की सूचना जल्दी ही उन्हें दी जाएगी इसके अलावा पर्वतीय महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष पूर्व अपर सचिव लोकायुक्त जीवन चंद्र उप्रेती ने भी मुकुल चंद्र शर्मा के सराहनीय सेवा कार्यकाल एवं उत्कृष्ट समाज सेवा की प्रशंसा करते हुए कहा है कि उन्हें ऐसे जांबाज अधिकारियों एवं समाजसेवियों से बेहद खुशी मिलती है तथा शीघ्र हुए उन्हें एक भव्य समारोह के बीच सम्मानित करेंगे

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