बिंदुखत्ता राजस्व गांव आंदोलन को बल प्रदान करते पूर्व अपर सचिव जीवन उप्रेती
भारत की लोक जिम्मेदार पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पर्वतीय महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष तथा पूर्व अपर सचिव लोकायुक्त उत्तराखंड जीवन चंद्र उप्रेती सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का व्रत धारण कर चुके हैं और इसी संकल्प के साथ उन्होंने बिंदुखत्ता राजस्व गांव की मांग को लेकर किये जा रहे आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका शुरू कर दी है जीवन चंद्र उप्रेती आंदोलनकारियों के साथ साथ डोर टू डोर जाकर लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहे हैं पूर्व अपर सचिव जीवन चंद्र उप्रेती का कहना है कि बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देना यहां के वासिंदो का अधिकार है और उनको उनके अधिकारों से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक बाहुल्य क्षेत्र बिंदुखत्ता के अनेकों शहीदों ने भारत माता की रक्षा में अपने प्राणों का उत्सर्ग किया है अशोक चक्र मोहन नाथ गोस्वामी की यह कर्म स्थली है इसके अलावा गोविंद सिंह पपोला जगत सिंह कुमल्टा नंदा वल्लभ देवराड़ी जीवन खोलिया समेत अनेकों जावांजों ने मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राणों का उत्सर्ग किया है उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता के वासिंदों ने शिक्षा स्वास्थ्य सेना खेलकूद न्यायिक समेत अनेकों क्षेत्र में यहां का नाम रोशन किया है बिंदुखत्ता में उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों के निवास करते हैं इसलिए इसे मिनी उत्तराखंड भी कहा जाता है उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि आज भी यहां के लोग अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं लंबे संघर्षों के बाद यहां के लोगों को बिजली सड़क स्वास्थ्य सरकारी सस्ते गले की दुकानें आदि सुविधाएं तो मिली लेकिन राजस्व गांव से वे आज तक वंचित हैं ऐसे में वन अधिकार अधिनियम के तहत बिंदुखत्ता के लोगों को राजस्व गांव का दर्जा दिया जाना न्याय संगत है और उनका अधिकार भी है जीवन चंद्र उप्रेती ने कहा कि वह बिंदुखत्ता के संघर्ष में हरदम साथ रहेंगे और राजस्व गांव की मांग को लेकर वे आर पार की लड़ाई लड़ रहे हैं उल्लेखनीय है कि जीवन चंद्र उप्रेती कानून के भी अच्छे जानकार हैं एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भी उनकी सराहनीय भूमिका रही है प्रवासी उत्तराखण्डियों को एक मंच प्रदान करने के लिए उन्होंने लखनऊ में पर्वतीय महासभा का भी गठन किया जिसके वे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं
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