ब्रह्मलीन वीरेंद्र पुरी महाराज का किया गया षोडशी संस्कार
उत्तराखंड देवभूमि पार्टी के संस्थापक विरेंद्रपुरी महाराज का आज षोडसी संस्कार किया गया वीरेंद्र पुरी महाराज का 13 सितंबर को स्वर्गवास हो गया था वह पूर्व में गायत्री शक्तिपीठ के बगल में प्राचीन शिव मंदिर में निवास करते थे नेशनल हाईवे की जद में आने के कारण उनका मंदिर वहां से हट चुका था उसके बाद वह लाल कुआं के वीआईपी गेट के समीप एक आश्रम में निवास कर रहे थे वीरेंद्र पुरी महाराज श्री पंचदस नाम जूना अखाड़े से भी जुड़े बताए गए थे फलाहारी मंदिर के महंत केशवानंद पुरी महाराज ने उनके ब्रह्मलीन होने की सूचना अपने साधु समाज को दी जिसके चलते हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला से विरेंद्रपुरी के गुरु भाई राजपुरी शिष्य लक्ष्मी नारायण पुरी यहां पहुंचे और विरेंद्रपुरी की षोडसी संस्कार का कार्य शुरू किया इससे पूर्व केशवानंदपुरी राजपुरी तीरथ गिरी विजय गिरी आदि ने लालकुआं कोतवाली में जाकर प्रभारी निरीक्षक ब्रजमोहन सिंह राणा से आश्रम की चाबी की बात की चाबी लेने के बाद संत समाज द्वारा वीरेंद्र पुरी के आश्रम के समीप प्रतीकात्मक समाधि दी गई क्योंकि उनकी समाधि 14 सितंबर को ही समाजसेवी हेमंत गोनिया द्वारा लालकुआं मुक्तिधाम के समीप लगा दी गई थी उससे पूर्व तक वीरेंद्र पुरी के संबंध में फलाहारी आश्रम के महंत को जानकारी नहीं थी वीरेंद्र पुरी के पूर्व आश्रम के बाद संत समाज ने फलाहारी मंदिर में षोडसी संस्कार किया संस्कार के तहत साधु समाज को 16 वस्तुएं प्रदान की जाती है तथा भंडारा भी किया जाता है यहां मुख्य रूप से फलाहारी मंदिर के महंत केशवानंद पुरी महाराज हिमाचल सोलन से आए राजपुरी शांतिपुरी के विजय गिरी दवाई फॉर्म नगला बाईपास के पवन गिरी महाराज तीरथ गिरी महाराज माई देविकापुरी रचित गिरी महाराज आकाश गिरी महाराज के अलावा समाजसेवी हिमांशु जोशी मंदिर के भक्त राजकुमार आदि भी मौजूद रहे उल्लेखनीय है कि वीरेंद्र पुरी का 13 सितंबर को निधन हो गया था 14 सितंबर को हल्द्वानी के समाज सेवी हेमंत गोनिया ने अपने निजी खर्चे से व्यवस्था जुटाकर उनका अंतिम संस्कार किया तथा मुक्तिधाम के बगल में उन्हें समाधि दी गई वीरेंद्र पुरी को समाधि देने के बाद ही फलाहारी मंदिर के बाबा केशवानंदपुरी को जानकारी मिल पाई इसके बाद उन्होंने अपने अन्य साधु समाज को भी जानकारी दी
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