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सघन वन लगाने के लिए पौधे और तकनीक उपलब्ध कराएंगे डॉक्टर आशुतोष पंत

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आइए सघन वन लगाएं, ये प्राणवायु के भंडार हैं।

जिस गति से विकास के नाम पर पेड़ काटे जा रहे हैं आने वाले समय में ऑक्सीजन की भी कमी हो जाएगी। जंगल कम होने से लगातार तापमान बढ़ रहा है, बारिश की कमी हो रही है या वर्षा का पैटर्न बदल रहा है। कहीं अतिवृष्टि हो रही है तो कहीं सूखा पड़ रहा है। यह बहुत चिंताजनक है। यह तो एक स्थापित तथ्य है कि जहां पेड़ ज्यादा होते हैं वहां ऑक्सीजन का घनत्व कुछ अधिक होता है। आप घने जंगल के अंदर जाकर देखें तो वहां का तापमान अपेक्षाकृत कम होता है।
अब शहरों में इतनी जगह तो है नहीं कि बड़े जंगल बनाए जा सकें पर हम चाहें तो थोड़ी सी जगह में भी सघन वन लगा सकते हैं। मियाबाकी विधि से छोटी सी जगह पर बहुत नजदीक नजदीक पौधे लगाने से यहां बहुत कम समय में घना जंगल बन जाता है। जहां जंगल होगा वहां तितली, चिड़िया सब बसेरा कर लेते हैं एक पूरा पारिस्थिक तंत्र विकसित हो जाता है। मुझे इसका अनुभव है अब तक छोटे छोटे कई सघन वन बनाए हैं। ऐसा ही एक रुद्रपुर के पुराना जिला चिकित्सालय परिसर में है।
यदि कोई किसान, स्कूल या अन्य संस्था अपने परिसर में सघन वन लगाना चाहें तो मुझसे संपर्क कर सकते हैं। मेरे द्वारा पौधे और तकनीकी जानकारी निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी बस सिंचाई की व्यवस्था आपको करनी होगी।

डॉ आशुतोष पन्त
पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी / पर्यावरणविद।

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