युग ऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी का सदचिंतन
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‼️ऋषि चिंतन ‼️
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पत्नी का सदैव सम्मान कीजिए
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👉 बहुत से व्यक्ति अपने को स्त्री से बड़ा समझकर अथवा लापरवाही से अपनी पत्नियों के साथ शिष्टता का व्यवहार करना अनावश्यक समझते हैं, यह एक बड़ी भूल है। जो लोग अपने दांपत्य जीवन को सफल बनाने के इच्छुक हों उनको सदैव अपनी पत्नी के प्रति सम्मानयुक्त व्यवहार और वार्तालाप करना चाहिए। जो पुरुष उससे कठोर व्यवहार करते हैं, अपनी आश्रित समझकर तिरस्कार करते हैं, उनकी बेइज्जती करते रहते हैं, वे अश्लील हैं। गुप्त मन में उनकी स्त्रियाँ उन्हें दुष्ट राक्षसतुल्य समझती हैं। ऐसा प्रसंग ही मत आने दीजिए कि नारी को मारने-पीटने का अवसर आए। उसे अपने आचार, व्यवहार, प्रेमभरे संबोधन से पूर्ण संतुष्ट रखिए।
👉 पत्नी की भावनाओं की रक्षा, उसके गुणों का आदर, उसके शील, लज्जा, व्यवहार की प्रशंसा मधुर संबंधों का मूल रहस्य है। पत्नी आपकी जीवनसहचरी है। अपने सद्व्यवहार से उसे तृप्त रखिए।
👉 पत्नी, पति की प्राण है, पुरुष की अर्द्धांगिनी है, पत्नी से बढ़कर कोई दूसरा मित्र नहीं पत्नी तीनों फलों- धर्म, अर्थ, काम को प्रदान करने वाली है और पत्नी संसार-सागर को पार करने में सबसे बड़ी सहायिका है। फिर, किस मुँह से आप उसका तिरस्कार करते हैं ?
👉 उनसे मधुर वाणी में बोलिए। आपके मुँह पर मधुर मुस्कान हो, हृदय मे सच्चा निष्कपट प्रेम हो, वचनों में नम्रता, मृदुलता, सरलता और प्यार हो। स्मरण रखिए, स्त्रियों का ‘अहं’ बड़ा तेज होता है, वे स्वाभिमानी, आत्माभिमानी होती हैं। तनिक सी अशिष्टता या फूहड़पन से कुद्ध होकर आपके संबंध में घृणित धारणाएँ बना लेती हैं। उनकी छोटी-मोटी माँगों या फरमाइशों की अवहेलना या अवज्ञा न करें। इसमें बड़े सावधान रहें। जो स्त्री एक छोटे से उपहार से प्रसन्न होकर आपकी दासता और गुलामी करने को प्रस्तुत रहती है, उसके लिए सब कुछ करना चाहिए। अतः पत्नी का आदर करें, उनके संबंध में कभी कोई अपमानसूचक बातें मुँह से न निकालें और उनकी उपस्थिति में या अनुपस्थिति में उनकी हँसी न करें।
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गृहलक्ष्मी की प्रतिष्ठा- Code GP-07 पृष्ठ 22
🐍।।पं श्रीराम शर्मा आचार्य।।🐍
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