राजभाषा सप्ताह समापन अवसर पर रेलवे ने किया भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन
बरेली राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार तथा रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार मण्डल रेल प्रबन्धक कार्यालय, पूर्वोत्तर रेलवे, इज्जतनगर पर ‘राजभाषा सप्ताह समारोह-2026‘ 14 सितम्बर से 18 सितम्बर, 2026 तक‘ मनाया गया। राजभाषा सप्ताह समापन समारोह के अवसर पर भव्य कवि सम्मेलन का शुभारंभ मंडल रेल प्रबंधक सुश्री वीणा सिन्हा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सह अपर मुख्य राजभाषा अधिकारी डा. उरबान सितांशु आदि ने माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सह अपर मुख्य राजभाषा अधिकारी डा. उरबान सितांशु ने कवियों का माल्यार्पण कर मंच पर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन का सहायक कार्मिक अधिकारी सह राजभाषा अधिकारी द्वारा किया गया।
कवि सम्मेलन का शुभारम्भ बरेली के गीत एवं गजल के विख्यात कवि श्री कमल सक्सेना द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ ।
प्रख्यात कवि आनंद गौतम ने अपनी रचना कुछ इन शब्दों में सुनाकर श्रोताओं की तालियाँ बटोरीं –
उलझे हुए प्रश्नों का समाधान करें हम।
आओ कि अपने देश का उत्थान करें हम।।
वरिष्ठ गीतकार कमल सक्सेना ने श्रृंगार रस के अपने गीतों से उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया, उन्होंने अपनी बात कुछ इस तरह कही-
मिटेंगी हस्तियाँ तेरा वतन तब याद आएगा।
मिटेगी हस्ती अपना वतन तब याद आएगा।।
स्वदेशी रंग में रंगकर तेरी बेटी जवान होगी।
तुझे इस देश का चोला-चलन तब याद आएगा।।
वरिष्ठ कवि श्री राजेश गौड़ ने पुरानी यादों ताजा करते हुए अपनी पँक्तियों को सुनाया-
मैंने कभी अपने आँसुओं का हिसाब नहीं रखा,
बरसों पुराने मेरी डायरी के पन्ने आज भी गीले हैं।
कवि सचिन शर्मा, अध्यापक, आदर्श निकेतन इंटर कॉलेज, अटामाण्डा, बरेली ने बेटियों का जिक्र करते हुए बेटी पर अपनी कविता सुनाई –
मानो ब्रह्म लोक से कोई, सुखद संदेशा आया है,
धन्य-धन्य है घरद्वार, जहाँ बेटी ने जीवन पाया है।
मंच का संचालन करते हुए डा. मुकेश ’मीत’ ने हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए पंक्तियों गा कर सुनाई –
जन जन की भाषा हिन्दी है,
अपनी भाषा हिन्दी है।
पूर्व राजभाषा अधिकारी, पूर्वोत्तर रेलवे, इज्जतनगर प्रभाकर मिश्र ने देश के सामाजिक परिवेश पर तीखा प्रहार करते हुए खूब वाहवाही लूटी कि –
रिश्तों को ’यूज’ करके व्यापार की तरह।
भूल गए कल के अखबार की तरह।
माँ-बाप पूछते हैं, क्या हुआ ’प्रभाकर’?
घर में भी मिल रहे हो, बाजार की तरह।
रेलवे के ही सेवानिवृत्त हास्य कवि श्री पी.के. दीवाना ने अपनी पंक्तियां से सभी श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया-
हास्य-व्यंग्य का कवि हूँ, लोगों को हँसाता हूँ
पर खुद नहीं हँस पाता हूँ,
क्योंकि –
एक बार मुसीबत में फँस गया था
गलती से पत्नी पर हँस गया था।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में मंडल रेल प्रबंधक सुश्री वीणा सिन्हा ने कहा कि ’राजभाषा सप्ताह समारोह’ के दौरान मण्डल पर साहित्यिक आयोजन एवं प्रतियोगिताएं भी आयोजित गईं। आज का कवि-सम्मेलन बहुत ही मजेदार और जोरदार रहा। कवियों ने एक से बढ़कर एक रोचक कविताएं सुनायीं। इन कविताओं में सरस्वती वन्दना के साथ हास्य और श्रृंगार रस की प्रधानता थी। सभी कवियों ने एक खुशनुमा माहौल बनाया। जैसा कि आप सभी जानते हैं हम रेल अधिकारी संरक्षित और सुरक्षित ट्रेन संचालन के लिए दिन-रात लगे रहते हैं। ऐसे में कवि सम्मेलन जैसे आयोजन के जरिए ही हम सभी को साहित्य से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने कवियों द्वारा प्रस्तुत कविताओं की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और ऐसे कार्यक्रमों के बार-बार आयोजन की आवश्यकता बताई।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सह अपर मुख्य राजभाषा अधिकारी डा. उरबान सितांशु नाग ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
जनसंपर्क अधिकारी
इज्जतनगर मंडल
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