पढ़िए उत्तराखंड के संदर्भ में पर्वतीय महासभा के अध्यक्ष जीवन चंद्र उप्रेती का आलेख

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उत्तराखंड/विचारणीय बिंदु

पर्वतीय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जीवन चंद्र उप्रेती (पू अपर सचिव लोकायुक्त उत्तराखंड),का स्पष्ट कहना है कि पर्वतीय महासभा की स्थापना वर्ष १९९३ में लखनऊ राजधानी,उत्तर प्रदेश में स्व बी डी सनवाल जी, पू मुख्य सचिव,उत्तरप्रदेश,आई सी एस की संरक्षता एवं कर्नल कल्याण सिंह रावत जी की अध्यक्षता में पर्वतीय मूल के लोगों के सहयोग और उत्तराखंड क्षेत्र के विकास के लिए गठित हुई।श्री उप्रेती,,तत्कालीन संस्थापक एवं महासचिव रहे जो वर्तमान में अध्यक्ष के पद पर कार्यरत है।उनका कहना है कि महासभा द्वारा सर्वप्रथम उत्तराखंड के युवाओं के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा पिछड़ा वर्ग आयोग,उत्तरप्रदेश में उठाया और उसके उपरांत अलग राज्य के मुद्दे पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती पर दबाव बनाते हुए अलग उत्तराखंड राज्य का प्रस्ताव केंद्र सरकार को प्रेषित कराया साथ ही इसके उपरांत मुख्य मंत्री मुलायम सिंह के काल में विक्टोरिया पार्क,लखनऊ में २ अक्टूबर का मौन जलूस एवं धरना प्रदर्शन एवं अनेक समय समय पर रैली आदि की,जिसमें डी ए वी कॉलेज में राजनाथ जी को भी आमंत्रित किया गया।अनेकों बैठकों में माननीय नारायण दत्त तिवारी जी,श्री निशंक जी,श्री धर्म सिंह रावत जी,
श्री जसवंत बिष्ट जी, श्री सतपाल महाराज जी,आदि अनेकों गणमान्य लोगों ने एवं शीर्ष अधिकारियों नए सहभागिता की।
अनेकों राज्यों में प्रवासी पर्वतीयों के संगठनों का भी विशेष सहयोग रहा। पूर्व सैनिकों एवं उनके अनेकों संगठन का विशेष सहयोग रहा।पर्वतीय महासभा द्वारा कुमाऊँ एवं गढ़वाल क्षेत्र में विकास कार्य हेतु अनेक धरने दे कर मोटर मार्ग एवं जन विकास का कार्य किया।
वर्ष 98 में भारत सरकार के गृहमंत्रालय द्वारा उत्तराखंड राज्य सृजन पर पर्वतीय महासभा के 2 प्रतिनिधियों को विचार विमर्श हेतु आमंत्रित किया,जिसमें श्री कल्याण सिंह रावत ,अध्यक्ष एवं श्री बी डी सनवाल,संरक्षक का नाम सम्मिलित है।इसी बीच उत्तराखंड क्षेत्र के जनमानस, जिसमें युवाओं,महिलाओं,नौकरशाहों एवं पूर्व सैनिकों का विशेष सहयोग रहा। अनेकों जवान शहीद भी हुए।
अंततोगत्वा उत्तराखंड राज्य का प्रदुभाव होते ही स्व धर्मसिंह रावत जी,संस्थापक,भारत की लोक जिम्मेदार पार्टी द्वारा
13 सूत्रीय ज्ञापन के साथ गैरसैंण राजधानी की मांग की और उन्होंने अपना एक लेख भी लिखा जिसमें स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में विकास की अपार संभावनाएं है।उनका यह लेख मेरा उत्तराखंड का सपना देखा जा सकता है।
दुर्भाग्य बस सत्ता के लोलुप दलों द्वारा विगत 25 वर्षों में उत्तराखंड की जो स्थिति बनाई वह आज
बद से बदतर नजर आती है।भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है, दलगत राजनीति आदर्श वाद को खो चुकी है, अपव्यय,प्रलोभन, क्रय विक्रय,अपराध और जनता को भ्रमित करना उद्देश्य बन गया है ।
ऐसी स्थिति में यदि आदर्श राजनीति,आदर्श सामाजिक व्यवस्था की अपेक्षा की जाए तो हमे गंभीर,सावधान होकर भ्रम जाल में न फसते हुए निष्पक्ष आदर्श राजनीति हेतु किसी दलगत राजनीति में न पड़ कर जातिवाद,क्षेत्रवाद,वर्ग वाद की संकीर्ण विचारों से मुक्त होकर आदर्श व्यक्ति को सत्ता में पहुंचाना होगा।
तभी आदर्श राजनीतिक सत्ता परिवर्तन संभव है।
सावधान रहना है कि यदि किसी भी सामाजिक संगठन/सामाजिक आंदोलन में राजनीति की बू आए तो सफलता पाना मुश्किल होगा।

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जीवन चंद्र उप्रेती
राष्ट्रीय अध्यक्ष,
पर्वतीय महासभा।
९४५२२९५२०१

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