बंधन को मुक्ति में बदल देती है सदगुरुदेव की कृपा : महात्मा आलोकनंद
श्री हंस प्रेम आश्रम संजय नगर बिंदुखत्ता में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में सदगुरु देव श्री सतपाल जी महाराज के परम शिष्य एवं आश्रम के प्रबंधक महात्मा आलोकानंद जी ने कहा कि मनुष्य का जीवन बंधन से शुरू होता है लेकिन सदगुरु देव की कृपा से उसे जीते जी मुक्ति की प्राप्ति हो जाती है उन्होंने कहा कि भक्ति के मार्ग पर चलते हुए जब कोई बाधा आ जाए तो समझो वही बंधन है और जब भक्ति का मार्ग निष्कंटक हो जाए तो समझना चाहिए कि उसे मुक्ति मिल गई है और यह मुक्ति गुरु भक्ति से ही संभव है उन्होंने कहा की दुविधा से भरा हुआ जीवन हमेशा बंधन का कारण होता है उन्होंने उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि यदि आपको नदी को पार करना है तो आपको उस छोर को छोड़ना पड़ेगा जिस छोर पर आप खड़े हैं छोड़ने वाला छोर ही बंधन कहलाता है और जिस अगले छोर को आप प्राप्त करते हैं वही मुक्ति है यहां मुख्य रूप से ध्यान सिंह रावत उम्मेद सिंह रावत पान सिंह जीना केसर सिंह धामी,ब्रह्मानंद स्वामी नाथ पंडित मथुरा दत्त भुवन पनेरु जवाहर सिंह दानू गोविंदी बिष्ट हंसी रावत बसंती दानू समेत अनेकों प्रेमी जन मौजूद रहे
हल्दूचौड़ राम मंदिर में भंडारे का आयोजन आज