परोपकार को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया वन विभाग के इन अधिकारी ने

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समाज में ऐसे भी लोग होते हैं जो अपनी जिम्मेदारियां का निर्वहन कुशलतापूर्वक करने के साथ-साथ अपने सामाजिक उत्तरदायित्वों का भी बखूबी पालन करते हैं या यूं कहा जाए कि परोपकार जिनके जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है ऐसी एक नेक इंसान के रूप में जाने जाते हैं वन क्षेत्राधिकारी मुकुल चंद्र शर्मा जो अब तक 227 लावारिस शवों का दाह संस्कार करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर चुके हैं इसके अलावा भी वन क्षेत्राधिकारी मुकुल चंद्र शर्मा हर उस जरूरतमंद तक पहुंचने की कोशिश करते हैं जिसे वास्तव में मदद की आवश्यकता है मुकुल चंद्र शर्मा के जीवन का उद्देश्य है परहित सरिस धर्म नहीं भाई परोपकार को ही अपना धर्म बना चुके मुकुल चंद्र शर्मा जनपद नैनीताल के बल्दियाखान अंतर्गत मनोरा रेंज में कार्यरत हैं मुकुलचंद शर्मा के जीवन में परोपकार की भावना बचपन से ही थी और इसे उन्होंने समय-समय पर जीवंत भी किया बात जब कोरोना संक्रमण की रही उस दौरान भी उन्होंने पीड़ितों के लिए हर संभव प्रयास किया इसके अलावा भी कई जरूरतमंदों को शिक्षा स्वास्थ्य व अन्य सामग्री प्रदान करते रहते हैं उन्होंने हल्द्वानी के प्रमुख समाजसेवी हेमंत गोनिया एवं उनकी टीम के साथ मिलकर पिछले दो वर्षों में 227 से ज्यादा लावारिस लोगों के दाह संस्कार करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है वास्तव में ऐसे वन क्षेत्राधिकारी मात्र क्षेत्र के नहीं बल्कि पूरे उत्तराखंड के गौरव कहे जा सकते हैं कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के द्वारा उन्हें शीघ्र ही सम्मानित किए जाने का भी निर्णय लिया गया है तथा 9 नवंबर को अनेक संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है जिसकी विधिवत सूचना मुकुलचंद शर्मा जी को भी दे दी जाएगी

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