कल है अक्षय तृतीया , इसका महात्म्य समझा रहे हैं आचार्य त्रिभुवन उप्रेती

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सभी तिथियों में सर्वोत्तम तिथि अक्षय तृतीया एवं भगवान परशुराम जयंती 19 अप्रैल को– तिथियों में सर्वोत्तम तिथि अक्षय तृतीया इस बार रविवार 19 अप्रैल वैशाख शुक्ल पक्ष को पड रही है अक्षय तृतीया भाग्य, सौभाग्य, विद्या, धन संतान ऐश्वर्य के कामना व प्राप्ति के लिए मनाया जाता है कहा गया है कि इस दिन किये गये कर्य पूजा कामना नव निर्माण यज्ञ, हवन, पूजा पाठ विवाह, यज्ञोपवीत व धार्मिक अनुष्ठान, खरीददारी। जमीन, भूमी, भवन, विद्या प्रारम्भ, अनुष्ठान, आदि। कार्यों का कभी क्षय नही होता इस दिन भगवान परशुराम जयंती, होने से भी मुहूर्त शानदार है। प्रात: 10 बजकर 49 मिनट तक द्वितीया तिथि रहेगी तत्पश्चात तृतीया तिथि आरम्भ होगी जो 20 अप्रैल प्रातः 07 बजकर 28 मिनट तक रहेगी।भरणी व कृतिका नक्षत्र का सानिध्य एवं आयुष्मान योग कौरव व गर करण का सानिध्य भी तिथि को विशेष बना रहे है। इस दिन चंद्रमा दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक मेष राशि तत्पश्चात वृष राशि में संक्रमण करेंगे। अक्षय तृतीया, भूमी शोधन, वाहन क्रय, सोना चांदी खरीदने, बालक के प्रथम केश छेदन, व विद्यालय में प्रथम प्रवेश व अक्षर प्रारम्भ करने के लिए श्रेष्ठ फल सूचक दिन है। इस दिन अपने कुल पुरोहित को अन्न वस्त्र दक्षिणा देने से पितृ दोष से निजात मिलती है।। प्रात: काल आदित्य स्त्रोत का पाठ कर भगवान सूर्य को गुड़ केसर, शहद, लाल फूल, अनार, चढायें। व भगवान परशुराम की पूजा करें।। नूतन क्रय करने का मुहूर्त—प्रातः 11 बजे से 2 बजकर 07 मिनट, सायं 5 बजकर 41 मिनट से रात्री 7 बजकर14 मिनट तक,।। पंडित त्रिभुवन उप्रेती संस्कार ज्योतिष भाग्य दर्पण नया बाजार हल्दूचौड हल्द्वानी लालकुआँ नैनीताल।।

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