10 दिवसीय गणेश चतुर्थी महोत्सव के महत्व पर प्रकाश डाल रही हैं डॉक्टर मंजू जोशी

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​श्री सिद्धिविनायक चतुर्थी उपवास व स्थापना 2026

​सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय।
सभी सनातनी पाठकों एवं धर्मावलंबियों को सादर नमस्कार, प्रणाम एवं जय माता दी।
​अवगत कराना चाहूँगी दिनांक 14 सितंबर 2026, दिन सोमवार को श्री गणेश चतुर्थी पर्व मनाया जाएगा। प्रथम पूज्य श्री गणेश जी को विद्या, बुद्धि के देवता, विघ्नहर्ता, मंगलकारी, रक्षा कारक, सिद्धिदायक, समृद्धि, शक्ति और सम्मान देने वाले देव के रूप में स्मरण किया जाता है।

​अस्य प्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्य प्राणाः क्षरन्तु च।
श्री गणपते त्वम् सुप्रतिष्ठो वरदो भव॥
​सनातन धर्म में गणेश चतुर्थी पर्व का विशेष महत्व है। दस दिनों तक चलने वाले इस विशेष पर्व पर प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश अपने भक्तों के घरों में विराजते हैं। गणेशोत्सव भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होता है तथा अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ इसका समापन होता है।

​इस वर्ष 14 सितंबर 2026 से गणेशोत्सव का आयोजन प्रारंभ होगा तथा 25 सितंबर 2026 (अनंत चतुर्दशी) को भगवान गणेश जी की मूर्ति (प्रतीकात्मक विसर्जन) का विधि-विधान पूर्वक विसर्जन किया जाएगा।

(शास्त्रों के अनुसार विसर्जन भगवान का नहीं, अपितु पूजा के लिए प्रतिमा में किए गए उनके अक्षत व जल रूपी सांकेतिक आह्वान का होता है।)

​शुभ मुहूर्त एवं स्थापना समय (2026)
​चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर 2026 को प्रातः 07:06 से 15 सितंबर 2026 को प्रातः 07:44 तक।
​मुख्य मध्याह्न गणेश पूजा व मूर्ति स्थापना मुहूर्त: प्रातः 11:02 से अपराह्न 01:31 तक।
(शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री गणेश जी का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था, अतः इसी अवधि में मूर्ति स्थापना एवं मुख्य पूजन करना सर्वश्रेष्ठ व अत्यंत फलदायी माना गया है।)

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​चंद्र दर्शन निषेध
​गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन को लेकर पौराणिक मान्यता है कि इसी तिथि को भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया था। ब्रह्मवैवर्त पुराण एवं गणेश पुराण के अनुसार इस दिन चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक लगता है।

​यदि भूलवश इस दिन चंद्रमा के दर्शन हो जाएं, तो कलंक दोष के निवारण हेतु श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित इस प्रामाणिक मंत्र का पाठ करें–
​सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहा जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥

​पूजा विधि
​प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में जागें एवं नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नानादि करने के उपरांत स्वच्छ/लाल वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें। पूजा स्थल में अखंड ज्योति प्रज्वलित करें। भगवान गणपति का स्मरण करें। कलश में जल भरें तथा जल में सुपारी व अक्षत डालें और कलश को स्वच्छ वस्त्र से बांधें।
​आगच्छ भगवन्देव स्थाने चात्र स्थिरो भव।
यावत्पूजां करिष्यामि तावत्त्वं सन्निधौ भव॥
​इस मंत्र का जप करते हुए भगवान श्री गणेश जी का ध्यान करें, चौकी स्थापित करें और उस पर लाल वस्त्र बिछाएं (केवल मिट्टी से निर्मित श्री गणेश जी की प्रतिमा ही स्थापित करें)।
​स्थापना से पूर्व भगवान गणेश को पंचामृत से स्नान कराएं। तत्पश्चात गंगाजल से स्नान कराकर शुभ मुहूर्त (प्रातः 11:02 से 01:31 )में चौकी पर विराजित करें। भगवान गणेश के साथ चौकी पर दो सुपारी (रिद्धि और सिद्धि माता के प्रतीक रूप में) स्थापित करें। भगवान गणेश जी को रोली, कुमकुम, अक्षत एवं पुष्प अर्पित करें। 108 दूर्वा चढ़ाएं। गजानन महाराज को चांदी का वर्क लगाएं। तदोपरांत भगवान श्री गणेश जी को लाल वस्त्र/लाल पुष्प जनेऊ, पान, सुपारी, लौंग, इलायची और भोग अर्पित करें। 11/21 मोदक-लड्डू का भोग लगाएं।
​घी की 11 बत्ती से आरती करें तथा भगवान गणेश के इन मंत्रों का जाप करें–
​ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
​ॐ गं क्षिप्रप्रसादनाय नमः॥
​ॐ नमो गणपतये कुबेरेकाद्रिको फट् स्वाहा॥
​ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वरवरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥

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​(दक्षिणवर्ती यानी दायीं ओर घूमी हुई सूंड वाले गणेश जी सिद्धिविनायक कहलाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इनके दर्शन मात्र से समस्त कार्य सिद्ध हो जाते हैं। किसी भी विशेष कार्य हेतु प्रस्थान करने से पूर्व इनके दर्शन करने से सफलता एवं शुभ फल की प्राप्ति होती है।)

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​भगवान श्री गणेश जी आप सभी के जीवन से विघ्न, बाधाओं एवं नकारात्मक ऊर्जा का नाश कर सुख, समृद्धि, सद्बुद्धि एवं उत्तम आरोग्य प्रदान करें।

​ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी
वैदिक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ
8395806256

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