बाबा वीरेंद्र पुरी को दी गई समाधि, समाजसेवी हेमंत गौनिया और टीम ने निभाया मानवता का फर्ज

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🕉️ अज्ञात से पहचान तक: बाबा वीरेंद्र पुरी महाराज को मिली सम्मानजनक समाधि, हेमंत गौनिया ने निभाया इंसानियत का फर्ज
हल्द्वानी। देवभूमि उत्तराखंड में मानवता और सेवा की एक और मिसाल सामने आई है। हल्द्वानी निवासी प्रमुख समाजसेवी एवं RTI कार्यकर्ता हेमंत गौनिया ने एक अज्ञात साधु के रूप में दर्ज बाबा वीरेंद्र पुरी महाराज को सम्मानजनक समाधि देकर इंसानियत का फर्ज निभाया। बाबा वीरेंद्र पुरी महाराज का बीते दिवस निधन हो गया था। समाजसेवी हेमंत गोनिया ने बताया कि प्रारंभिक रूप से अस्पताल के रिकॉर्ड में उनकी पहचान अज्ञात एवं लावारिस के रूप में दर्ज थी, लेकिन उनके पास मिले दस्तावेजों और कागजात की जांच के बाद उनकी पहचान वीरेंद्र पुरी महाराज के रूप में सामने आई।
जानकारी के अनुसार वीरेंद्र पुरी महाराज कुछ समय फलाहारी आश्रम में भी रहे थे। फलाहारी आश्रम की ब्रह्मलीन सेवापुरी से संबंधित दस्तावेज भी उनके पास से प्राप्त हुए, जिनसे उनकी पहचान के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। पहचान सामने आने के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर भी उनकी साधु परंपरा के अनुरूप समाधि देने का निर्णय लिया गया।
बताया गया कि बाबा वीरेंद्र पुरी महाराज की समाधि पहले चित्रशिला घाट के आसपास देने की व्यवस्था की जानी थी, लेकिन वहां आवश्यक व्यवस्था एवं मजदूर उपलब्ध न होने के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसके बाद समाजसेवी हेमंत गौनिया एवं उनकी टीम ने व्यवस्था करते हुए लालकुआं श्मशान घाट के निकट बाबा को सम्मानपूर्वक समाधि दी।


इस पूरे कार्य में समाजसेवी हेमंत गौनिया, रेंजर नवीन कपिल, दीपक तिवारी, वंश गौनिया, विक्रम बिष्ट, अमित रस्तोगी एवं संजय जायसवाल का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। टीम ने बाबा के अंतिम सम्मान से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाओं को पूरा किया और यह सुनिश्चित किया कि एक साधु को अंतिम समय में लावारिस अवस्था में न छोड़ा जाए।
हेमंत गौनिया का कहना है कि “जिसका कोई नहीं होता, उसका समाज होता है। मृत्यु के बाद भी प्रत्येक इंसान सम्मान का अधिकारी है। जब किसी व्यक्ति की पहचान सामने नहीं आती, तब भी उसकी अंतिम विदाई सम्मान के साथ होना हमारा मानवीय कर्तव्य है।”
बाबा वीरेंद्र पुरी महाराज को समाधि दिए जाने के बाद क्षेत्र में हेमंत गौनिया और उनकी टीम के इस प्रयास की सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि हेमंत गौनिया जैसे समाजसेवी परोपकार और मानवता की जीती-जागती मिसाल हैं, जो किसी पहचान, स्वार्थ या सरकारी सहायता की प्रतीक्षा किए बिना जरूरतमंदों के साथ खड़े होते हैं।
लोगों ने हेमंत गौनिया एवं उनकी पूरी टीम के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि ईश्वर सभी समाजसेवियों को दीर्घायु, यशस्वी एवं कल्याणमयी जीवन प्रदान करे, ताकि मानव सेवा का यह सिलसिला इसी तरह आगे बढ़ता रहे।
एक साधु को सम्मानपूर्वक समाधि देना केवल अंतिम संस्कार की प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस मानवीय संवेदना का प्रमाण है जिसमें इंसान की पहचान से पहले उसकी गरिमा को महत्व दिया जाता है। बाबा वीरेंद्र पुरी महाराज को मिली यह अंतिम सम्मानजनक विदाई इसी भावना की एक मार्मिक मिसाल बन गई है।

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