पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने पर लालकुआं से आई पहली प्रतिक्रिया

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हल्द्वानी/ 16 मई

  • पेट्रोल-डीज़ल मूल्य वृद्धि से जनता पर महंगाई का हमला बंद करो : भाकपा माले

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में की गई ताज़ा बढ़ोतरी देश की मेहनतकश जनता, किसानों, मजदूरों, छात्रों, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग पर महंगाई का सीधा हमला है। एक तरफ देश पहले से बेरोज़गारी, महंगाई और आर्थिक संकट से जूझ रहा है, दूसरी तरफ सरकार ने तेल कंपनियों और बड़े कॉरपोरेट घरानों के मुनाफे बचाने के लिए जनता की जेब पर डाका डालने का काम किया है।

भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के युद्ध का बहाना बना रही है, जबकि सच यह है कि वर्षों से पेट्रोलियम उत्पादों पर भारी टैक्स लगाकर जनता से वसूली की गई है। जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता हुआ तब सरकार ने जनता को राहत नहीं दी, लेकिन जैसे ही संकट बढ़ा, पूरा बोझ आम लोगों पर डाल दिया गया है।

पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। इससे खेती की लागत बढ़ती है, माल ढुलाई महंगी होती है, बस किराए बढ़ते हैं और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में आग लग जाती है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और मेहनतकश तबकों पर पड़ता है।

असल में आज का वैश्विक संकट साम्राज्यवादी नीतियों, युद्धोन्माद और तेल संसाधनों पर नियंत्रण की लड़ाई का परिणाम है। दुनिया भर में युद्ध और तनाव का बोझ मेहनतकश जनता पर डाला जा रहा है, जबकि हथियार कंपनियां और ऊर्जा कॉरपोरेशन मुनाफा कमा रहे हैं। भारत सरकार भी जनता को राहत देने के बजाय कॉरपोरेट हितों की रक्षा में लगी हुई है।

भाकपा माले मांग करती है : पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ी हुई कीमतें तुरंत वापस ली जाएं। पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाए गए भारी केंद्रीय करों में कटौती की जाए। सार्वजनिक परिवहन और किसानों को विशेष राहत दी जाए। तेल कंपनियों के मुनाफे और निजीकरण की नीति पर रोक लगाई जाए।
महंगाई पर नियंत्रण के लिए आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित किया जाए।

डॉ कैलाश पाण्डेय
जिला सचिव
भाकपा माले नैनीताल

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