गुरु पूर्णिमा : जन्म मृत्यु के अंतहीन चक्र से मुक्त कराते हैं सदगुरुदेव: महात्मा सत्यबोधानंद

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गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर मानव उत्थान सेवा समिति के राष्ट्रीय संगठन सचिव एवं सदगुरुदेव श्री सतपाल महाराज जी के परम शिष्य युवा संत महात्मा सत्यबोधानंद जी ने सभी क्षेत्र वासियों को शुभकामना देते हुए इसकी महिमा का वर्णन बताया है महात्मा सत्यबोधानंद जी ने कहा कि आज का दिन गुरु शिष्य परंपरा का सबसे महान दिन है किसी भी शिष्य के जीवन में गुरु का होना परम आवश्यक है क्योंकि जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं उन्होंने कहा कि हम गुरु महाराज के कमल रूपी चरणों की वंदना करते हैं जो कृपा के सागर हैं तथा जिनकी कृपा प्राप्त होते ही शिष्य के अंदर अज्ञान जनित अंधकार अहंकार एवं समस्त विकार इस प्रकार से नष्ट हो जाते हैं जैसे सूर्य की किरण पढ़ते ही अंधकार लुप्त हो जाता है नष्ट हो जाता है महात्मा सत्यबोधानंद जी ने कहा कि गुरु की महिमा का वर्णन कर पाना संभव नहीं है क्योंकि गुरु के द्वारा ही ईश्वर प्राप्ति का मार्ग मिलता है आत्म तत्व का बोध होता है उन्होंने कहा कि गुरु बिन भवनिधि तरई ना कोई जो
बिरंची शंकर सम होई अर्थात व्यक्ति कितना ही शक्तिशाली हो जाए कितना ही प्रतिष्ठित हो जाए लेकिन भवसागर से पार तो उसे केवल गुरुदेव ही करते हैं बिना गुरु के वह भवसागर अर्थात जन्म मृत्यु के अंतहीन चक्र से मुक्त नहीं हो सकता है महात्मा सत्यबोधानंद जी ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अपने ईष्ट आराध्य सदगुरुदेव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन होता है क्योंकि हमारे जीवन में गुरु का बहुत बड़ा योगदान है और आज के दिन शिष्य अपने गुरुदेव से यही प्रार्थना करता है कि हे गुरुदेव हमारे अंदर किसी भी प्रकार के विषय विकार ना आने पाए हमें सदैव आपके श्री चरणों का ध्यान रहे हमारा मन सदैव आपकी भक्ति में लगा रहे और जो उपकार आपने हमारे ऊपर किया है वह अनुदान हमारे ऊपर हमेशा बरसाते रहना महात्मा सत्यबोधानंद जी ने कहा कि गुरु ही उसे पावन नाम का शिष्य को बोध करा देते हैं जो निरंतर हमारी सांसों की माला में रमन कर रहा है प्रत्येक स्वांस में वह नाम समाया हुआ है उसी का बोध समय के तत्वदर्शी सदगुरुदेव महाराज जी अपने शिष्य को करिते हैं उल्लेखनीय है कि मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद अंतर्गत मुरादनगर में हंस इंटर कॉलेज में 28 एवं 29 जुलाई को दो दिवसीय विराट गुरु पूजन महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है जिसमें देश के विभिन्न राज्यों के 20000 से ज्यादा शिष्य गुरु आराधना के लिए पहुंचे हुए हैं