जानिए कैसे बनता है भाग्य बता रहे हैं आचार्य प्रकाश बहुगुणा

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भाग्य कैसे बनता है?
वह पूर्व जन्म के कर्म जिनका फल चाहे वह सुख हो या दुःख हम वर्तमान जीवन में भोगते है भाग्य बनाते हैं। हर व्यक्ति का भाग्य उसके पूर्व जन्म के कर्मों के अनुसार निर्धारित होता है और उन्ही कर्मों की वजह से वर्तमान जन्म में एक विशेष तरीके से व्यवहार करने के लिए बाध्य होता है। सुख-दुःख, धन-गरीबी, क्रोध, अहंकार, आदि गुण जो भी हम जीवन में पाते हैं वह सब पूर्व निर्धारित होता है। ज्योतिष केवल घटनाएं जानने का विज्ञान नहीं है, वह हमें हमारा भूत और भविष्य भी बताता है। साधारण व्यक्ति भाग्य को परिवर्तित नहीं कर सकता है और ना ही भाग्य के विषय में आसानी से जाना जा सकता है। क्योंकि कर्म के फलों में परिवर्तन करने के लिए एक साधना रत ज्योतिषी और परिश्रमी साधक को लम्बे समय तक धैर्य के साथ प्रयत्न करने की आवश्यकता होती है।
याद रखें भाग्य किसी जादू टोने अथवा टोटकों से नहीं बनता। जब तक प्रारब्ध ना कटे कोई कुछ नहीं कर सकता प्रारब्ध केवल पुरुषार्थ (सत् कर्म) से ही काटा जा सकता है।

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