आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत गौनिया ने किया एक और बड़ा खुलासा, पढ़िए सनसनीखेज रिपोर्ट

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CAG रिपोर्ट में उत्तराखंड के वित्तीय प्रबंधन पर उठे सवाल, ₹14,318 करोड़ की बचत का खुलासा
₹65,012 करोड़ के कुल अनुदान-विनियोग के मुकाबले ₹50,694 करोड़ खर्च, 75 अपूर्ण परियोजनाओं पर ₹509.66 करोड़, सरकारी उपक्रमों के आंकड़ों में ₹569.98 करोड़ का अंतर
देहरादून/हल्द्वानी। उत्तराखंड सरकार के वित्तीय वर्ष 2021-22 के लेखापरीक्षित खातों पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में राज्य के वित्तीय प्रबंधन, बजट क्रियान्वयन, वित्तीय रिपोर्टिंग, अधूरी परियोजनाओं और सार्वजनिक उपक्रमों की स्थिति से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
CAG की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021-22 में राज्य के कुल अनुदान एवं विनियोग ₹65,012.40 करोड़ थे, जबकि वास्तविक व्यय ₹50,694.35 करोड़ रहा।
इस प्रकार कुल ₹14,318.05 करोड़ की बचत दर्ज हुई।
रिपोर्ट में वर्ष 2021-22 के दौरान राज्य का राजकोषीय घाटा ₹3,736 करोड़ और राजस्व अधिशेष ₹4,128 करोड़ दर्ज किया गया है।
CAG ने गारंटी कमीशन की प्राप्ति को लेकर भी आंकड़े दर्ज किए हैं। देय गारंटी कमीशन ₹7.17 करोड़ था, जबकि वास्तविक प्राप्ति ₹1.87 करोड़ रही। इस प्रकार ₹5.30 करोड़ की कमी रही।
75 परियोजनाएं अधूरी, ₹509.66 करोड़ की लागत
CAG रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2022 तक लोक निर्माण विभाग की 75 अपूर्ण/चालू परियोजनाएं थीं, जिनकी कुल लागत ₹509.66 करोड़ थी।
रिपोर्ट में इन परियोजनाओं के लंबित रहने से संबंधित वित्तीय और परियोजना प्रबंधन के पहलुओं पर ध्यान दिलाया गया है।
40 मामलों में ₹7,072.07 करोड़ का अनुपूरक प्रावधान अनावश्यक
बजट प्रबंधन से संबंधित जांच में CAG ने पाया कि 40 मामलों में ₹7,072.07 करोड़ का अनुपूरक प्रावधान अनावश्यक साबित हुआ।
इसके अलावा पुनर्विनियोजन के बाद भी 40 मामलों में एक करोड़ रुपये से अधिक की बचत दर्ज की गई।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट है कि कुल अनुपूरक प्रावधान ₹7,074.57 करोड़ था। इसलिए ₹7,072.07 करोड़ को कुल अनुपूरक बजट के रूप में नहीं, बल्कि 40 मामलों में अनावश्यक साबित हुए अनुपूरक प्रावधान के रूप में देखा जाना चाहिए।
₹47,758.16 करोड़ का अतिरिक्त व्यय नियमितीकरण के लिए लंबित
CAG ने यह भी दर्ज किया कि वर्ष 2005-06 से 2020-21 की अवधि से संबंधित ₹47,758.16 करोड़ के अतिरिक्त व्यय का राज्य विधानसभा द्वारा नियमितीकरण किया जाना बाकी था।
यह मामला राज्य की बजट एवं विनियोग प्रक्रिया में विधायी नियमितीकरण से संबंधित है।
‘800-अन्य व्यय’ में ₹1,343 करोड़ और ‘800-अन्य प्राप्तियों’ में ₹1,223.56 करोड़
वित्तीय लेखों की गुणवत्ता और पारदर्शिता से संबंधित हिस्से में CAG ने ‘800-अन्य व्यय’ तथा ‘800-अन्य प्राप्तियां’ शीर्षों में दर्ज रकम पर भी ध्यान आकर्षित किया है।
रिपोर्ट के अनुसार ‘800-अन्य व्यय’ में लगभग ₹1,343 करोड़ और ‘800-अन्य प्राप्तियों’ में ₹1,223.56 करोड़ दर्ज किए गए।
CAG के अनुसार इस प्रकार के व्यापक वर्गीकरण से विभिन्न मदों में वास्तविक खर्च और प्राप्तियों का विश्लेषण कठिन हो सकता है।
32 राज्य सार्वजनिक उपक्रमों में 9 निष्क्रिय
CAG रिपोर्ट में राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों की स्थिति भी दर्ज की गई है।
31 मार्च 2022 तक राज्य में 32 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम थे, जिनमें 9 निष्क्रिय बताए गए।
रिपोर्ट के अनुसार 14 सार्वजनिक उपक्रमों के अभिलेखों और राज्य के Finance Accounts में इक्विटी, ऋण और गारंटी से संबंधित आंकड़ों के बीच ₹569.98 करोड़ का अंतर पाया गया।
7 उपक्रमों का संचित घाटा ₹4,907.48 करोड़
CAG के अनुसार सात राज्य सार्वजनिक उपक्रमों में संचित घाटा ₹4,907.48 करोड़ था और इनकी कुल नेटवर्थ माइनस ₹3,404 करोड़ रही।
इनमें पांच ऐसे उपक्रम थे जिनकी पूंजी संचित घाटे के कारण पूरी तरह क्षीण हो चुकी थी और इनसे संबंधित राज्य सरकार के ₹295.66 करोड़ के ऋण बकाया थे।
सरकारी कंपनियों के 130 खाते और निगमों के 12 खाते लंबित
रिपोर्ट में वित्तीय विवरणों को समय पर अंतिम रूप देने में देरी का मामला भी सामने आया।
CAG के अनुसार 19 सरकारी कंपनियों के 130 खाते लंबित थे।
इसके अलावा चार वैधानिक निगमों के 12 खाते भी लंबित पाए गए।
आरटीआई के माध्यम से हेमंत सिंह गौनिया ने मांगी थी जानकारी
आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया द्वारा संबंधित सूचनाओं और CAG रिपोर्टों की प्रतियां मांगी गई थीं।
उपलब्ध आधिकारिक पत्राचार में CAG के केंद्रीय व्यय कार्यालय की ओर से बताया गया कि संबंधित CAG रिपोर्टें सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं तथा CAG की वेबसाइट पर देखी जा सकती हैं। पत्र में असंतुष्ट होने की स्थिति में निर्धारित समय के भीतर प्रथम अपील का प्रावधान भी बताया गया है। �
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गौनिया का कहना है कि सूचना प्राप्त करने के बाद भी दस्तावेजों और सूचनाओं को स्पष्ट एवं पूर्ण रूप से उपलब्ध कराने की मांग को लेकर उन्होंने आगे पत्राचार और अपील की प्रक्रिया जारी रखी है।
सूचना आयोग से स्पष्ट और पूर्ण सूचना की मांग
आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया के अनुसार उनका उद्देश्य संबंधित वित्तीय अभिलेखों और CAG रिपोर्टों से जुड़ी सूचनाओं को स्पष्ट, पूर्ण और दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त करना है।
उन्होंने कहा कि जहां सूचना अधूरी, अस्पष्ट या प्रश्नवार उपलब्ध नहीं होती है, वहां संबंधित सूचना आयोग के समक्ष नियमानुसार मामला रखा जाएगा।
इस मामले में केंद्रीय सूचना आयोग की ओर से आगे की कार्यवाही/जवाब प्राप्त होना अभी शेष बताया गया है।
CAG रिपोर्ट ने रखी वित्तीय प्रबंधन की तस्वीर सामने
CAG की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों में ₹14,318.05 करोड़ की बजट बचत, ₹47,758.16 करोड़ के अतिरिक्त व्यय का लंबित नियमितीकरण, 75 अपूर्ण परियोजनाएं, ₹5.30 करोड़ के गारंटी कमीशन की कमी, ‘800-अन्य’ मदों में बड़ी राशि तथा सार्वजनिक उपक्रमों की वित्तीय स्थिति जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं।
इन आंकड़ों के माध्यम से राज्य के बजट प्रबंधन, व्यय नियंत्रण, लेखांकन और सार्वजनिक उपक्रमों की वित्तीय स्थिति से संबंधित अनेक तथ्य सामने आते हैं।
यह रिपोर्ट भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की लेखापरीक्षा रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों पर आधारित है।

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