बंगलामुखी जयंती पर विशेष: महा रूद्र की शक्ति है बंगलामुखी, कल 24 अप्रैल को मनाई जाएगी बंगलामुखी जयंती
वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मां बगलामुखी जयंती मनाई जाती है बगलामुखी जिसे मां पीतांबरी के नाम से भी जाना जाता है मां बगलामुखी को दस महाविद्या में आठवीं महाविद्या के रूप में जाना जाता है इस वर्ष बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल को मनाई जाएगी 23 अप्रैल की रात्रि 8:50 से अष्टमी तिथि का शुभारंभ होगा जो 24 अप्रैल को 7:22 तक रहेगी ऐसे में उदय व्यापिनी तिथि के कारण 24 अप्रैल को ही मां बगलामुखी जयंती मनाई जाएगी मां बगलामुखी के अनन्य साधक बृजेंद्र पांडे गुरुजी बताते हैं कि मां बगलामुखी जिसे मां पीतांबरी भी कहा जाता है का स्मरण करने वाला व्यक्ति जीवन में कभी निराश नहीं होता है और वह अनेक विषम परिस्थितियों को भी पार कर अपना अभीष्ट प्राप्त कर लेता है मां बगलामुखी का सुमिरन करते ही उसके समस्त शोक रोग दुख संताप इस प्रकार से दूर हो जाते हैं जैसे प्रचंड अग्नि के संपर्क में आते ही सूखा तिनका भस्म हो जाता है बृजेंद्र पांडे गुरुजी बताते हैं कि बगलामुखी महारूद्र की शक्ति है उन्होंने समस्त उत्तराखंड वासियों को मां बगलामुखी जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मां बगलामुखी शत्रु विनाशक है और व्यक्ति के जीवन में शत्रु बाहरी हो यह जरूरी नहीं बल्कि उसके अंदर की चिंताएं शोक कलह क्लेश भी उसके शत्रु ही होते हैं इसके अलावा उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा शत्रु व्यक्ति का भय होता है और वह भय किसी ने किसी रूप में जीवन पर्यन्त बना रहता है उन्होंने बताया कि बच्चा परीक्षा की तैयारी में लगा रहता है उसे सफलता अथवा असफलता के बीच का भय बना रहता है युवा अपने करियर को लेकर चिंतित रहता है नौकरीपेशा व्यक्ति अपनी स्थिरता को लेकर के परेशान रहता है व्यापारी अपने व्यापार के उतार-चढ़ाव को लेकर चिंतित बना रहता है कहने का तात्पर्य है कि व्यक्ति के जीवन में हर आयु अथवा हर परिस्थिति में भय किसी ने किसी रूप में बना ही रहता है और व्यक्ति का आत्मविश्वास धीरे-धीरे कम होने लगता है ऐसे समय में उसे शक्ति की आवश्यकता होती है जो उसे भय को रोक दे और यह शक्ति मां बगलामुखी या मां पीतांबरी के स्मरण करने से प्राप्त होती है यह अशांत मन अथवा भय को रोक कर साहस प्रदान करती है बृजेंद्र पांडे गुरुजी ने बताया कि बगलामुखी का अर्थ होता है एक ऐसी शक्ति जो नकारात्मक गति को रोक देती है उन्होंने कहा कि शत्रु का तात्पर्य केवल बाहरी शक्तियों से नहीं बल्कि हमारे भीतर का भय संदेह एवं भ्रम है जब हम मां बगलामुखी का ध्यान करते हैं तो हमारे अंदर एक स्थिरता का अनुभव होने लगता है उन्होंने कहा कि बगलामुखी हर उस व्यक्ति के लिए आवश्यक है जो जीवन में साहसपूर्वक आगे बढ़ना चाहता है बगलामुखी शक्ति हमें बाहरी संघर्षों से पहले अपने भीतर के भय से लड़ना सिखाती है बगलामुखी की आराधना करने वाले साधक के सभी शत्रुओं का समन होता है और कष्टों का निवारण भी होता है उन्होंने बताया कि वैसे तो बगलामुखी की आराधना उपासना हर कार्य के लिए उपयोगी है किंतु विशेष रूप से युद्ध विवाद शास्त्रार्थ मुकदमे और परीक्षा में विजय प्राप्त करने के लिए यह अमोघ शस्त्र है उन्होंने कहा कि नवग्रह दोषों की मुक्ति अपने ऊपर हो रहे अकारण अत्याचार डिप्रेशन बंधनों से मुक्त होने संकट से उबरने के लिए भी अचूक शस्त्र है उन्होंने बताया कि बगलामुखी की शक्ति इतनी प्रचंड है कि साधक जिस किसी को भी बाधा मानता है बड़े तीव्रता से उसे पर विजय प्राप्त कर लेता है उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि शत्रु कोई व्यक्ति हो बल्कि आपके तनाव के कारण उत्पन्न होने वाली विषम परिस्थितियों भी शत्रु ही है
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