उत्तराखंड में स्थित है यह देव दरबार जहां मां की प्रतिमा दिन में तीन बार करती है रूप परिवर्तित

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जगद्गुरु शंकराचार्य ने उत्तराखंड की भूमि को देवभूमि की उपमा से अलंकृत किया है ईश्वर की आस्था समदर्शिता और न्यायशीलता के यहां अनेक देवालय हैं जो स्थानीय के अलावा दूरदराज के भक्तों के लिए भी आस्था के प्रमुख केंद्र हैं जहां पहुंचकर भक्त मनोवांछित फल की प्राप्ति करते हैं और देव दरबार में शीश नवाते हुए अपने जीवन को सफल एवं सार्थक बनाते हैं उत्तराखंड के ऐसे ही प्रमुख स्थलों में एक है गढ़वाल मंडल के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित मां धारी देवी का मंदिर जो अलकनंदा नदी पर स्थित है मां धारी देवी को मां काली का ही रूप माना जाता है जिसकी शक्ति रूप में पूजा की जाती है मां धारी को उत्तराखंड के चार धाम केदारनाथ बद्रीनाथ यमुनोत्री और गंगोत्री का रक्षक देवी माना जाता है अर्थात मां धारी के आशीर्वाद को लेने के बाद चार धाम की यात्रा पूरी तरह से निष्कंटक हो जाती है मां धारी के संदर्भ मान्यता है कि मां की प्रतिमा दिन में तीन बार कन्या महिला एवं वृद्धा के रूप में परिवर्तित होती है श्रीनगर से तकरीबन 15 किलोमीटर की दूरी पर श्रीनगर बदरीनाथ हाईवे पर माता का यह बेहद पावन मंदिर स्थित है जिसके दर्शन करने से ही मनुष्य के समस्त प्रकार के रोग संताप दूर हो जाते हैं या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तस्ए नमस्तस्ए नमस्तस्ए नमो नमः

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