जय मां पूर्णागिरि :भारत नेपाल धार्मिक रिश्तों का अनुपम धाम है मां का यह दरबार

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उत्तर भारत के सुविख्यात धाम मां पूर्णागिरि में नवरात्र पर गजब की रौनक छाई हुई है आस्था के पथ पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा हुआ है प्रतिदिन मां के दरबार में 50000 से ज्यादा श्रद्धालु दर्शनों को आ रहे हैं तथा अपनी मुरादे पूरी कर रहे हैं मां पूर्णागिरि का यह पावन दरबार उत्तराखंड के चंपावत जनपद के टनकपुर से लगभग 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है मां शारदा के चरणों में बसा टनकपुर शहर में पहुंचकर लगभग 18 किलोमीटर का मार्ग वाहन द्वारा तय किया जा सकता है

उसके बाद 6 किलोमीटर की दूरी चढ़कर मां के दर्शन किए जा सकते हैं मां का यह पावन दरबार नाभि के रूप में स्थापित है जिसकी कहानी माता सती से जुड़ी हुई है माता सती के जिन स्थान पर अंग गिरे वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए गए यहां पर मान्यता है की माता का नाभी स्थल गिरा इस मंदिर के दर्शन के बाद टनकपुर बैराज पारकर नेपाल के कंचनपुर जिले में स्थित ब्रह्मदेव नामक स्थान में सिद्ध बाबा का मंदिर है जो मां पूर्णागिरि के परम भक्त थे मान्यता है कि मां के दर्शनों का संपूर्ण लाभ तभी प्राप्त होता है जब सिद्ध बाबा के भी दर्शन किए जाएं वर्तमान में यहां पूर्णागिरी का दरबार भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक एवं धार्मिक रिश्तों का भी सेतु बना हुआ है

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