क्या है गुरु पूर्णिमा का महत्व बता रही हैं डॉक्टर मंजू जोशी
[28/07, 14:33] Ajay Upreti: अज्ञान के अंधकार से मोक्ष के द्वार तक: गुरु पूर्णिमा 2026 की महिमा एवं ग्रह-गोचर
॥ ॐ श्री गुरुभ्यो नमः ॥
अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया।
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
अज्ञानता से अनंत ज्ञान की ओर ले जाने वाले श्री गुरु चरणों में कोटि-कोटि वंदन! समस्त धर्मानुरागी आत्मीय जनों को आदरपूर्वक नमन, जय माता दी।
अवगत कराना चाहूंगी दिनांक 29 जुलाई 2026, दिन बुधवार को परम पावन गुरु पूर्णिमा (आषाढ़ पूर्णिमा), उपवास एवं स्नान-दान का महापर्व मनाया जाएगा।
आषाढ़ मास की (पूर्णिमागुरु पूर्णिमा) केवल एक साधारण तिथि नहीं, अपितु हमारे जीवन को दिशा देने वाली उस दिव्य ऊर्जा के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है।
गुकारस्त्वन्धकारस्तु रुकारस्तेज उच्यते।
अन्धकारनिरोधत्वात् गुरुरित्यभिधीयते॥
शास्त्रों में ‘गु’ का अर्थ अज्ञान रूपी अंधकार और ‘रु’ का अर्थ ज्ञान का प्रकाश माना गया है।
जिस मनुष्य के जीवन में एक सच्चे गुरु का वरदहस्त और मार्गदर्शन मिल जाता है, उसका संपूर्ण जीवन ही रूपांतरित हो जाता है। गुरु केवल व्यक्तिगत उन्नति का मार्ग ही नहीं दिखाते, बल्कि हमारे भीतर सामाजिक दायित्व बोध भी जगाते हैं। वास्तव में हमारे श्रेष्ठ होने की सार्थकता केवल स्वयं तक सीमित रहने में नहीं, अपितु यह इस बात में है कि हम समाज के कल्याण में क्या योगदान दे पा रहे हैं। एक श्रेष्ठ गुरु ही हमें इस योग्य बनाते हैं कि हम समाज के प्रति उत्तरदायी बनकर राष्ट्र व धर्म की सेवा कर सकें।
यह पावन दिन वेदों का वर्गीकरण करने वाले महर्षि वेदव्यास जी का अवतरण दिवस (व्यास पूर्णिमा) भी है। पराशर ऋषि के पुत्र महर्षि व्यास जी तीनों कालों के ज्ञाता थे। उन्होंने ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के रूप में ज्ञान की सरिता प्रवाहित की तथा महाभारत और 18 पुराणों की रचना करके सनातन संस्कृति को अमर आधार दिया।
वर्ष 2026 में गुरु पूर्णिमा पर वास्तविक ग्रह-गोचर एवं शुभ योग
ज्योतिषीय दृष्टि से 29 जुलाई 2026 का दिन अत्यंत दुर्लभ और आत्म-उन्नति के लिए अनुकूल बन रहा है:
गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में सूर्य के साथ विराजमान होकर गुरु आदित्य शुभ योग का निर्माण कर रहे हैं। गुरु का अपनी उच्च राशि में होना साधना, बौद्धिक विकास और गुरु-कृपा प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ महासंयोग बनाता है।
चंद्रमा का मकर राशि में संचार: चंद्रमा पूर्ण कलाओं के साथ मकर राशि (उत्तराषाढ़ा व श्रवण नक्षत्र) में रहकर साधकों में मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक संकल्प को सुदृढ़ करेंगे।
बुध का मिथुन राशि में गोचर: बुध देव अपनी स्वराशि मिथुन में रहकर ज्ञानार्जन व संवाद क्षमता में निखार लाएंगे।
शनि का मीन व शुक्र का सिंह राशि में संचार: शनि देव मीन में और शुक्र देव सिंह राशि में रहकर आत्म-चिंतन और उच्च भक्ति भाव को बल प्रदान करेंगे।
साथ ही गुरु पूर्णिमा पर्व पर प्रीति योग तथा आयुष्मान योग इस पर्व को और भी श्रेष्ठ बना रहे हैं
शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 28 जुलाई 2026, सायंकाल 06:18 बजे से
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 29 जुलाई 2026, रात्रि 08:05 पर ।
गुरु पूजन का मुहूर्त: प्रातः 05:41 से 09:05 तक।
चंद्रोदय का समय–सांयकाल 07:15 पर।
पूजा विधि
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में प्रबोध के पश्चात स्नान आदि से निवृत्त होकर घर के मंदिर को गंगाजल से पवित्र करें और उपवास का संकल्प लें। मंदिर में दीप प्रज्वलित कर भगवान श्री हरि विष्णु और देवाधिदेव महादेव का ध्यान करें, सृष्टि के परम गुरु भगवान शिव एवं पालनहार भगवान विष्णु को आसन प्रदान कर, पीतांबर, बागंबर अर्पित करें,रोली, कुमकुम,अक्षत, पुष्प व नैवेद्य अर्पित करें। तदोपरांत शांत/ शुद्ध मन से अपने गुरुदेव का स्मरण करें; स्मरण रखें, गुरु केवल एक शरीर नहीं, अपितु वह चेतना हैं जो सदैव आपका मार्गदर्शन कर रही हैं। संभव हो तो उनके प्रत्यक्ष दर्शन कर चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करें, या मानसिक रूप से उनके श्रीचरणों में अपना सर्वस्व समर्पित करें। अपनी सामर्थ्य अनुसार गुरुजी को अन्न, वस्त्र, फल भेंट कृतज्ञता में समर्पित करें।
ब्रह्मांड रूपी मायाजाल में माँ (जननी) हमारी पहली दृश्य गुरु हैं, गुरु पूर्णिमा पर मां के श्री चरणों में शीश नवाएं और अपनी स्वेच्छा से उन्हें भेंट अर्पित करें।
पूजन के समय विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें, पीली व सफेद वस्तुओं (दूध, चावल, हल्दी, चना दाल) का दान करें और गुरु पूर्णिमा पर खीर का भोग लगाकर सभी में प्रसाद बाँटें।
(ज्योतिष में पूर्णिमा तिथि का सीधा संबंध मन के कारक चंद्रमा की पूर्णता से है, और आषाढ़ पूर्णिमा का यह दिन ज्ञान व विवेक के स्वामी देवगुरु बृहस्पति की आराधना को समर्पित है। यदि आप लंबे समय से मानसिक अशांति, भ्रम या जीवन में दिशा की कमी महसूस कर रहे हैं, तो चंद्रमा और बृहस्पति के इस पावन सामंजस्य पर उपवास का संकल्प लें। यह पावन संकल्प आपके मन को शांति, जीवन में सही मार्गदर्शन और आत्मिक बल प्रदान करेगा।)
ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी
वैदिक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ
📞 8395806256
दुग्ध संघ अध्यक्ष मुकेश बोरा को मिली जन्मदिवस पर ढेर सारी शुभकामनाएं